उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग ने बड़े करदाताओं के लिए वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था लागू की

लखनऊ,। माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के बड़े करदाताओं को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से विभाग ने वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यह नई व्यवस्था 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी और संयुक्त आयुक्त (कारपोरेट) तथा संयुक्त आयुक्त (कारपोरेट सेल-ऑयल सेक्टर) स्तर पर लागू की जाएगी।इस संबंध में प्रमुख सचिव, राज्य कर, श्रीमती कामिनी रतन चौहान ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत संबंधित स्तर पर पंजीकृत करदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई सामान्य परिस्थितियों में अनिवार्य रूप से वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएगी। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की विभिन्न धाराओं के अनुरूप होगी। उन्होंने कहा कि इससे न्याय निर्णयन की प्रक्रिया अधिक तेज, समयबद्ध, पारदर्शी और करदाता हितैषी बनेगी।प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि बड़े करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लचीलापन भी रखा गया है। यदि किसी कारणवश कोई करदाता या उसका अधिकृत प्रतिनिधि वर्चुअल सुनवाई के स्थान पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सुनवाई कराना चाहे, तो उसके प्रार्थना पत्र पर विचार कर संबंधित अधिकारी द्वारा अनुमति प्रदान की जा सकेगी।आयुक्त, राज्य कर, उत्तर प्रदेश डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि राज्य कर विभाग में कारपोरेट सर्किल का गठन बड़े करदाताओं को बेहतर एवं सुगम सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। वर्तमान में अधिकांश जीएसटी संबंधित कार्यवाहियां ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही हैं, लेकिन न्याय निर्णयन के कुछ मामलों में करदाताओं को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।उन्होंने कहा कि भौतिक सुनवाई की प्रक्रिया में कई बार करदाता अथवा उनके अधिकृत प्रतिनिधि समय पर उपस्थित नहीं हो पाते थे, जिससे मामलों में स्थगन लेना पड़ता था। कभी-कभी नियत तिथि पर अधिकारी के अवकाश पर होने से भी मामलों के निस्तारण में विलंब होता था। इससे करदाता और विभाग दोनों का समय, श्रम और संसाधनों की अनावश्यक खपत होती थी।वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था लागू होने से इन समस्याओं का प्रभावी समाधान होगा और मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा। विभाग का मानना है कि यह कदम प्रदेश में कर प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।