पूज्यश्री विजयेन्द्र सरस्वती स्वामी शंकराचार्य ने कांची मठ में वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से वैदिक कार्यक्रम को अयोध्या में कराने का बताया महत्व​

 

अयोध्या राम मन्दिर ध्वजारोहण कार्यक्रम के अनुसार श्री काँची कामकोटि पीठ के अयोध्या शाखा में श्री वाल्मीकि रामायण नवाहम् का पारायण १५ नवम्बर २०२५ से २३ नवम्बर २०२५ तक हुआ । श्री राम शडक्षरी, श्री राम गायत्री, सम्पूर्ण वेद पारायण और संगीत उपासना का कार्यक्रम भी हुआ । श्री काँची कामकोटि पीठ के ७० पीठाधिपति पूज्यश्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य स्वामीजी पारायण का पूर्णाहुती के अनुसार और धर्मद्वज प्रतिष्ठा के अनुसार अपना अनुग्रह भाषन विडियो काँन्फ्रन्स में दिये थे । उनके भाषण में वे अयोध्या और काँची का प्राचीन सम्बन्ध के बारे मे बोले । शंकराचार्य जी बोले की इस पारायण हि एक उदाहरण है अयोध्या का व्यवस्था और आस्था दिखाने के लिए । ब्रह्मश्री केशव वाजपाय दीक्षित जी इस पारायण का आयोजक थे । ५०० वर्ष के अंतर के वजह अयोध्या मे वैदिक कार्यक्रम करने का अवश्यक्ता को भी उन्होने बताये । प्रभु श्री राम और वैदिक कार्यक्रम का दिव्य सम्बन्ध भी बताये । उन्होने बताया कि अगस्त २०२५ में पूज्यश्री जयेन्द्र सरस्वती जी के नाम का मार्ग लोकार्पण भी किया गया।