
वो माँ है, बेटी है, बहन है प्राण,
हर रूप में वो है स्नेह की जान।
पर अपनी चिंता, रखती है बाद,
स्वास्थ्य को समझे जैसे कोई जंजाल।
थकती नहीं, फिर भी कुछ न कहे,
दर्द छुपा ले, आँसू हँसी में बहे।
निज देखभाल को माने उपेक्षा,
क्यों खुद से करे वो ये भिक्षा?
हर स्त्री का है यह अधिकार,
स्वस्थ रहे उसका तन और विचार।
ना केवल दूसरों की सेवा करे,
खुद के लिए भी समय वो धरे।
समय पर निदान, पोषण सही,
चेकअप हो हर महीने कहीं।
मासिक धर्म हो या मातृत्व काल,
जानकारी से ही हटे ये जाल।
आओ करें एक प्रण आज,
महिलाओं को दें स्वास्थ्य का राज।
जागरूक बनें, करें सम्मान,
स्वस्थ नारी से ही बनेगा राष्ट्र महान।
महिला स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा,
स्वस्थ रहने के लिए प्रयास करना होगा।
नियमित जांच और स्वस्थ आहार से,
महिलाएं अपने स्वास्थ्य को बनाएँ आधारl
व्यायाम और योग से शरीर मजबूत होता है,
मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
प्रजनन स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है,
महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।
स्वास्थ्य शिक्षा से जानकारी बढ़ती है,
महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहती हैं।
स्वस्थ जीवनशैली और आत्मविश्वास से,
महिलाएं अपने जीवन को बेहतर बना सकती हैं।
आओ हम सब मिलकर महिला स्वास्थ्य के प्रति,
जागरूकता फैलाएं और स्वास्थ्य को बढ़ावा दें।
महिलाएं स्वस्थ रहें, खुशहाल रहें,
और अपने जीवन को सफल बनाएं।
नेहा वार्ष्णेय “धारा”
दुर्ग छत्तीसगढ़