महाकुम्भ नगर। परंपरा के अनुसार महाकुम्भ में अखाड़े तीन अमृत स्नान करते हैं, लेकिन बुधवार को निरंजनी अखाड़े के साधु संतों ने चौथा स्नान किया। इसे गुरुभाई स्नान का नाम दिया जाता है। इस स्नान की परंपरा में वो सभी साधु संत जाते हैं जो शुरुआती दौर में एक साथ होते हैं। इस दौरान एक ट्रैक्टर पर महामंडलेश्वर की सवारी बैठी और पीछे-पीछे साधु-संत शामिल रहे। इस दौरान संतों ने खूब जयकारे लगाए।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि प्रयागराज महाकुम्भ में चौथा स्नान विशेष रूप से अखाड़े के संत महापुरुषों ने श्रद्धा भाव से किया। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरि ने बताया कि गुरु परंपरा के अनुसार तीन अमृत स्नान के पश्चात अखाड़े के तीन सचिव, 16 थानापति और महामंडलेश्वर स्वामी महेशानंद के साथ अखाड़े की पारंपरिक ध्वजा के साथ चौथे स्नान को आस्था और श्रद्धा के साथ पूर्ण किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरी (अर्जी वाले हनुमानजी), श्रीमहंत शंकारानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानन्द, महंत ओमकार गिरि, महंत दिनेश गिरि, महंत राधे गिरि, महंत नरेश गिरि, महंत राकेश गिरि और स्वामी राज गिरि के संग अनेक संत महापुरुष मौजूद रहे।