🌻🌻 ओ३म् 🌻🌻
*वाटसप गुरुकुल कक्षा-७*
प्रिय पाठक वृंद अभी हम ब्रह्माण्ड के तीसरे तत्व की परिचर्चा *ज्ञानकुंभ मेला के अवसर पर* कर रहे हैं।आज हम आपको बतायेंगे कि *बुद्धि के प्रकार व उसके गुण* कितने होते हैं।
ईश्वर ने मनुष्य को चार चीजें उपहार में दी हैं जो कि अन्य प्राणियों के पास नही हैं।
*[१]* वाणी *[२]* पाणि *[३]* भाषा *[४]* विचार शक्ति *[५]* बुद्धि
इस समय हमारा विषय बुद्धि है।
🥝 बुद्धि के प्रकार 🥝
सांख्य दर्शन में महर्षि कपिल कहते हैं *अध्यवसायी बुद्धि:।सांख्य २/१३* अर्थात् अध्यवसाय:= किसी विषय का निशचय करने वाला तत्व बुद्धि कहलाता है।यह बुद्धि *आठ(८) प्रकार* की होती है।
*(१) कुबुद्धि* जो बुद्धि अधर्म के कार्यों में रुचि लेती है उसे कुबुद्धि कहते हैं।
*(२) सद्बुद्धि* जो सत्य को ग्रहण व असत्य का त्याग करे वही है सद्बुद्धि।
*(३) मेधा बुद्धि* सत्य विश्वास से युक्ति बुद्धि ही मेधा है।
*(४) धारणा बुद्धि* शंसय रहित होकर स्थिर हो जाती है उसे धारणा बुद्धि कहते हैं।
*(५) सुमेधा बुद्धि* जो धार दार व तर्क युक्त पुर्ण बुद्धि है वही सुमेधा है।
*(६) प्रज्ञा बुद्धि* जो तमोगुण पर नियंत्रण प्राप्त कर लेती है।आलस्य कै मार भगाती है वही प्रज्ञा बुद्धि है।
*(७) प्रतिभा बुद्धि* जो मस्तिष्क को प्रखर ऊर्जा से भर दे।ध्यान को भटकने न दे वह प्रतिभा बुद्धि है।
*(८) ऋतंभरा बुद्धि*
जब रजोगुण व तमोगुण दोनों साधक के वश में हो जाते हैं तब ऋतंभरा जाग जाती है।
ऐंसी बुद्धि जिन मानवों के पास है वो *जल नामक पदार्थ* का यथा उपयोग करना जानते हैं और *पापों से बचने के लिए जल स्नान नहीं ज्ञान गंगा* में डुबकी लगाते हैं।
🍁शास्त्रों में बुद्धि की महिमा🍁
*भूतानां प्राणिन:श्रेष्ठा: प्राणिषु बुद्धि जीविन:।*
*बुद्धिमत्सु नरा:श्रेष्ठा: नरेषु ब्राह्मणा:स्मृता।।*
अर्थात् संसार में दो प्रकार के पदार्थ हैं।जड़ और चेतन।उनमें चेतन प्राणी श्रेष्ठ हैं। चेतन प्राणियों में भी बुद्धिजीवी श्रेष्ठ हैं। बुद्धिजीवियों में मानव श्रेष्ठ हैं। मानवों में ब्राहम्ण *(जो वेद पढ़ता व पढ़ाता है)* वो श्रेष्ठ है।
इसी क्रम को* *महात्मा महर्षि मनु* आगे बढ़ाते हुए लिखते हैं।
*ब्राह्मणेषु च विद्वांसो: विद्वत्सु कृतबुद्धय:।*
*कृत बुद्धिषु कत्रार: कर्तृसु ब्रह्मवेदिध:।।*
अर्थात् ब्राह्मणों में जो संकल्पित विद्वान है वो श्रेष्ठ है।उनमें भी वो श्रेष्ठ है जो श्रेष्ठ कर्मों में लगे हैं जिन्होंने पवित्र बुद्धि से ईश्वर का साक्षात्कार कर लिया है। *मनु०१/९६-९७*
इतना जानने पर स्वयं ही पता लग जाता है कि पाप कहां और केंसे नष्ट होंगे? शेष चर्चा कल…………
आचार्य सुरेश जोशी
*वाटसप गुरुकुल महाविद्यालय* आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर बाराबंकी उत्तर प्रदेश।