*पारिवारिक सत्संग*आचार्य सुरेश जोशी

🌹 ओ३म् 🌹
*पारिवारिक सत्संग*
प्रांत गुजरात के जनपद सांठरकाठा के तहसील प्रांतीज में वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार का द्वितीय दिवस सम्पन्न हुआ।
*🪔*याज्ञिक परिवार*🪔
🍁 मुख्य यजमान🍁
मातुश्री परसी बेन
🌻 *सह-यजमान*🌻
[१] श्रीमती मीरा कीमतानी।
श्री घनश्याम जी।
[२] श्रीमती लता कीमतानी ।
श्रीमान ललित भाई।
*पारिवारिक सत्संग*
पारिवारिक सत्संग के क्रम में *ईश्वर की आज्ञा* इस विषय पर संवादशाला चलाई ग ई। ईश्वर हमारा माता-पिता है।हम उसके पुत्र हैं। पुत्र वही कहलाता है जो माता पिता की आज्ञा का पालन करे!
अब प्रश्न उठता है कि ईश्वर की आज्ञा क्या है?और कहां हैं? इसका सीधा उत्तर है कि ईश्वर की चार आज्ञायें हैं।
(१) कर्म करते हुए जीना है।आलसी बनकर नहीं।
(२) केवल कर्म नहीं अपितु शुभ कर्म करते हुए जीना है।
(३) औसतन आयु १००वर्ष तक शुभ कर्म करते हुए जीना है।
(४) जो निष्काम भाव से कर्म करेगा वै कर्म के बंधनों से मुक्त हो जायेगा।
ईश्वर की यह आज्ञा वेद में है और *वेद ईश्वरीय वाणी है*।इस प्रकार ईश्वर की आज्ञा का पालन करना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।जो मानव ईश्वर की इन आज्ञाओं का पालन नहीं करके मनमानी उल्टे-सुल्टे कर्म करता है वो यदि वो सुविधाओं को प्राप्त भी कर लेगा तो भी सुखी नहीं हो सकेगा।क्योंकि सुख- दु:ख का संबध *पूजा,पाठ,स्नान,व कोरे-कर्मकांड* से नहीं है।अच्छे व बुद्धिपूर्वक किये कर्मों का फल सुख और अशुभ कर्मों का फल से दुख प्राप्त होता है।इस प्रकार निष्कर्ष निकला *सुख-दु:ख का निर्णय मनुष्यों के कर्मों के आधार पर ही* परमात्मा करता है।
जैंसा कर्म करो वैंसा फल मिलता है।
आज नहीं तो कल मिलता है।।
जितना गहरा है कुंआ
उतना मीठा जल होता है।
जीवन की हर समस्या का हल जीवन से ही मिलता है।।
कार्यक्रम के संयोजक आदरणीय *कमलेश कीमतानी* ने सभी श्रोताओं का आभार प्रकट करते हुए अगले सत्संग में आने का निवेदन किया और बताया कि आज दिनांक ३/१/२०२५ को सत्संग का विषय रहेगा *परिवार और संस्कार*
आचार्य सुरेश जोशी
*प्रवासीय कार्यालय*
प्रांतीज सांबरकांठा गुजरात प्रांत।।