🌹 ओ३म् 🌹
*डॉ माता-पिता ने कराये संस्कार*
अनन्त योनियों में केवल मानव योनि ही एक मात्र है जिसका निर्माण *संस्कारों* से होता है। संस्कार का अर्थ होता है *दुर्गुणों को हटाकर सद्गुणों का आधान करना तथा साधारण मानव को महामानव* बनाना। पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों को जितने ज्ञान व श्रम की आवश्यकता होती उतना परमात्मा उनको स्वाभाविक ज्ञान के रूप में परमात्मा देता है। मनुष्य को *नैमित्तिक ज्ञान* से अपने को मनुष्य बनाना होता है। नैमित्तिक ज्ञान का ही नाम है संस्कार जिनकी संख्या [ १६ ] सोलह है। इनकी संस्कारों को जिनके माध्यम से प्राप्त करना है वो तीन उत्तम शिक्षक हैं *माता-पिता और आचार्य* यदि माता-पिता व आचार्य योग्य नहीं तो *परिवार, समाज, राष्ट्र* भी निर्बल हो जाता है।
🌳 *महाशय भूषण*🌳
जनपद अंबेडकर नगर के सुप्रसिद्ध व्यसायी आर्य समाजी *महाशय भूषण आर्य* एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व के धनी हैं। वैदिक धर्म में आपकी 🔥मनसा वाचा कर्मणा प्रगाढ़ निष्ठा 🔥 है। आपने अपने बच्चों में पूर्ण पुरुषार्थ के साथ वैदिक संस्कृति का बीजारोपण किया जो आज *वट वृक्ष बनता* जा रहा है।
🌻 *डॉ पूनम+डॉ अजय*🌻
आपकी पुत्री आयुर्वेदाचार्य डॉ पूनम और आपके सुयोग्य दामाद डॉ अजय जी ने अपने अथर्व व पुत्री अद्विता का क्रमशः *नामकरण एवं कर्ण वेधन संस्कार* वैदिक रीति से सम्पन्न कराया। आजकल १६ संस्कार प्रातः विलुप्त से हो रहे हैं केवल विद्यालय शिक्षा रोजगार परक होने से *अर्थ प्रधान युग का निर्माण हो रहा है जबकि संस्कार उपेक्षित* हो रहे हैं परिणाम आज शिक्षित लोग ही दुराचार में अधिक लिप्त हो रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी अनियमित दिनचर्या 🌸 अवसाद 🌸 माइग्रेन 🌸 डिप्रेशन 🌸 लक्ष्यविहीन हो रही है उसका एकमात्र कारण है *संस्कार विहीन शिक्षा*।
डॉ पूनम एवं डॉ अजय की तरह प्रत्येक जागरूक माता-पिता को चाहिए अपने पुत्रों को योग्य बनाने के लिए उच्च शिक्षा के साथ समय -समय पर *वैदिक संस्कारों* द्वारा परिष्कृत भी करें! क्योंकि योग्य यजमानों का अनुकरण सर्व साधारण लोग करते हैं।
🪷 *कुशल संचालन*🪷
कार्यक्रम का कुशल संचालन 🌼 महाशय भूषण जी 🌼 ने किया।
🏵️ *सहयोगी जन*🏵️
[१] इंजीनियर कंचन।
[२] इंजीनियर अंकित।
[३] सुश्री प्रिंसी जायसवाल।
[४] श्रीयुत् राजेन्द्र जायसवाल।
🪷 *सह-पुरोहित*🪷
पंडिता रुक्मिणी देवी
वैदिक भजनोपदेशिका बाराबंकी
शिक्षा व संस्कार दोनों मंदिर हैं। *शिक्षा का मंदिर विद्यालय और संस्कारों का मंदिर घर* है। दोनों मंदिरों में अपने संतानों का एडमिशन कराना हर माता-पिता का परं कर्तव्य है।
आचार्य सुरेश जोशी
*वैदिक प्रवक्ता*
🪷 सचल कार्यालय 🪷
साबरमती एक्सप्रेस
*कोच संख्या -B-3*
स्टेशन अयोध्या धाम
* *रात्रि -7-27 मिनट*