देखो राखी का पर्व है आया
दिल में सब के उमंग जगाया
बहनों का दिल हुआ है हर्षित
अब होगी सब खुशियां अर्जित ।
वैसे तो कच्चे धागों की डोर है राखी
पर ,पक्की इसकी जोड़ है राखी
इसकी पकड़ है बड़ी अनमोल
जो भाई – बहन को रखती जोड़ ।
चित्रहार बचपन का है राखी
बचपन की याद दिलाती राखी
कितना प्यार था भाई- बहन में
ये ताजा करने आती राखी ।
दुआ भाई की होती राखी
उसकी उम्र संजोती राखी
यही दिलाए भाई को याद
उसकी बहना कर रही फरियाद ।
बहना के घर तुझे जाना होगा
राखी उस से बंधाना होगा
बहना कर रही तेरा इंतजार
जल्दी जाओ बीते ना त्योहार ।
ना होती भूखी बहन तोहफे की
वो भूखी होती बस भाई के प्यार की
वो आंख बिछाए बाट जोहती
गर भाई ना आए तो बहुत है रोती।
इसलिए ——————
संजू की ये है अरज सभी से
कभी ना फेरो मुंह बहन से
बड़े भाग्य से मिलती बहना
इसको मानो जीवन का गहना ।
बहना, तुम भी रखना इस बात का भान
टूटे कभी ना तेरे भाई का मान
करना काम हमेशा ऐसा
गर्व हो भाई को गहने जैसा ।
क्योंकि___________
बड़ा ही पावन है ये रिश्ता
होता नहीं ये बिल्कुल सस्ता
दोनों रखना इस डोर की लाज
तभी रहेगा ये रिश्ता आवाद ।
संजुला सिंह ,”संजू”
जमशेदपुर(झारखंड)