स्वतंत्र लेखन मंच पर साहित्यकारों का लगा हुजूम लगातार पांच दिन तक वैश्विक दिवस मनाए गए

स्वतंत्र लेखन मंच पर करीब 70 साहित्यकारों ने साहित्यिक समाज में जागृति की अलख जगाई एवं मंच पर निरंतर पाँच दिनों तक वैश्विक दिवस मनाए गए। स्वतंत्र लेखन मंच के संस्थापक,संपादक, अध्यक्ष डॉ विनोद वर्मा दुर्गेश “मुकुंद” मंच की संरक्षिका,संचालिका, संयोजिका, अध्यक्षा डॉ. दवीना अमर ठकराल “देविका”, कार्यकारिणी व लगभग 70 जागरूक रचनाकारों के अतुलनीय सहयोग से मंच पर विश्व बाल श्रम निषेध दिवस, विश्व पवन ऊर्जा दिवस, विश्व रक्तदाता दिवस, विश्व बुज़ुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस व विश्व पितृ दिवस पर अपनी सशक्त लेखनी से भावाभिव्यक्ति देकर समाज में जागरूकता लाने का प्रयास किया।

प्रतिदिन क्रमशः समर्पित मंच संचालक अशोक दोशी” दिवाकर”,सुरेश चंद्र जोशी” सहयोगी”, डॉ अनीता राजपाल “वसुंधरा”, वीणा टंडन “पुष्करा”, अनु तोमर “अग्रजा”, जया त्रिपाठी मिश्रा “संवेदना”, फूल चंद्र विश्वकर्मा “भास्कर”के मंच संचालन में 28,16, 28, 23 व 56 सक्रिय समर्पित व प्रबुद्ध रचनाकारों के सहयोग से सभी दिवस अविस्मरणीय व संदेशवाहक बने।

पाँच दिवसीय इस आयोजन में पाँचो दिन की रचनाएँ प्रेषित करने वाले अत्यंत सक्रिय व समर्पित सृजन कार अशोक दोशी “दिवाकर”, फूलचंद्र विश्वकर्मा”भास्कर”,नीरजा शर्मा “ अवनि” संगीता चमोली “इंदुजा”, संजीव भटनागर” सजग”, मोहन प्रसाद यादव “साधक”, डॉ पूनम सिंह “सारंगी”, वीना टंडन “पुष्करा”, नीता कपूर,नीतू रवि गर्ग “कमलिनी”, किरण भाटिया “नलिनी”, सविता मेहरोत्रा” सुगंधा” ने प्रतिदिन संदेश परक व प्रेरक अभिव्यक्ति देकर सच्चे सहित्य साधक का कर्तव्य निर्वहन किया।

सुरेश चंद्र जोशी”सहयोगी” , अनिल राही “प्रभात”, कृष्ण कांत मिश्र “कमल”, जवाहर देव , स्वर्ण लता “कोकिला” , बालमुकुन्द , होशियार सिंह यादव” बैरागी”, विजय कनौजिया, अरुण ठाकर “कवित्”, सिद्धी डोभाल “सागरिका”, सुनील कुमार , मंजुला सिन्हा “मेघा” जी, माधुरी श्रीवास्तव “यामिनी” जी, डॉ राम कुमार झा” निकुंज” जी, अनामिका वैश्य आईना “अनुजा ”, नृपेंद्र चतुर्वेदी” सागर”, रश्मि गुप्ता “रिंकी”, रंजना बिनानी “स्वरागिनी “, सुगंधा बहल , शिवशंकर लोध राजपूत , अंजू श्रीवास्तव , समीर उपाध्याय ,कवि रमाकांत सोनी ,घनश्याम सिंह कीनिया, अनु तोमर “अग्रजा”, नरेश उनियाल जी, बेली राम कनस्वाल, नंदा बमराडा “सलिला”, वीरेंद्र कुमार, बन्ता ठाकुर ,विद्या शंकर अवस्थी, सुमित जोशी राइटर “जोश”जी, कुसुम लता “तरुषी”, राजकुमारी,अनुजा दूबे, प्रमिला झरबड़े, राजेंद्र कुमार , संजय वर्मा,सुजीत कुमार, स्वाति जैसलमेरिया, हंसा श्रीवास्तव, सुरेंद्र बिंदल, मीना तिवारी, सुमन किमोठी “वसुधा” आशा बुटोला “सुप्रसन्ना”,कमला उनियाल” मृगनयनी” ,ओम प्रकाश आस, चंद्र भूषण निर्भय , कृष्णा बाघमरे , कृत्या नंद , डॉ पूर्णिमा पाण्डेय “सुधांशु” , सरोज डीमरी की गरिमामयी उपस्थिति ने पाँच दिवसीय आयोजन को गति प्रदान की।

मंच अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने आयोजन को भव्यता प्रदान करने वाले पांचो दिन सृजन करने वाले सृजनकारों का हृदय तल से आभार प्रकट करते हुए सभी रचनाकारों को “जागरूक साहित्य चिंतक सम्मान” से सम्मानित करते हुए कहा कि

वैश्विक दिवसों को मंच पर मनाकर मन आनंदित उल्लसित व प्रमुदित है।

सामूहिक रूप से साहित्यिक मंच पर अपने भाव अभिव्यक्त करने से समाज में जागरूकता का प्रादुर्भाव होता है।

इस मंच अध्यक्ष ने जानकारी दी कि मंच पर 17 जून से “योग सप्ताह” बनाने की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है।

स्वतंत्र लेखन मंच के सच्चे साहित्य साधकों के सहयोग से “विश्व योग”दिवस भी बड़े जोश व उत्साह के साथ मनाया जाएगा ।

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