श्रीराम कथा के भव्य आयोजन के बीच अभिनंदन ग्रंथ का विमोचन

श्रीराम कथा के भव्य आयोजन के बीच अभिनंदन ग्रंथ का विमोचन

 

प्रतापगढ़ (उ. प्र.): डाॅ वाई एस पाण्डेय के निज आवास गौरामाफी, प्रतापगढ़ उ.प्र. पर हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में 07 अक्टूबर’2026 को श्रीरामकथा का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य कथावाचक आदरणीय विद्यार्थी जी रहे।

इसी शुभ अवसर पर चार विभूतियों का अभिनंदन डॉ वाई एस पाण्डेय जी द्वारा किया गया, जिनमें से प्रथम व्यास पीठासीन विद्यार्थी जी को साहित्य वाचस्पति और श्री ज्ञान चंद्र मिश्र पूर्व प्राचार्य इंटर कॉलेज ऐलाही को प्राज्ञ शिरोमणि और पूर्व प्राचार्य श्री श्याम शंकर त्रिपाठी को विद्वत शिरोमणि तथा डॉ ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत सेवानिवृत्त स्नातकोत्तर शिक्षक (हिंदी) पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय को साहित्यिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों में महनीय कार्यों एवं उपलब्धियों के लिए “साहित्य महर्षि” से सम्मानित किया गया। सम्मान देते हुए चारों विभूतियों को डाॅ वाई एस पाण्डेय प्रकाश के आह्वान पर सम्मानित विशिष्ट व्यक्तित्व आचार्य बद्री नारायण मिश्र पूर्व प्राचार्य संस्कृत महाविद्यालय गौरामाफी ने चारों विभूतियों को अंग वस्त्र प्रदान करते हुए साल ओढ़ाकर माल्यार्पण करके मानद सम्मान पत्र प्रदान किया।

इसके उपरांत इसी अवसर पर श्री प्रशांत पाण्डेय गौरामाफी ने भी भी चारों विभूतियों का स्वागत माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र देकर किया, यह उनकी विशिष्ट सम्मान करने की सहज प्रवृत्ति का परिचायक है।

इसी अवसर पर डॉ इंद्रजीत पाण्डेय ने डाक्टरों की टीम को सम्मानित किया।

 

इसी क्रम में वर्ल्ड गोल्ड मेडलिस्ट, लाइफ टाइम एचीवर अंतरराष्ट्रीय लब्धप्रतिष्ठित विद्वान डाॅ० वाई एस पाण्डेय जी ने सम्मानित विद्वानों की टीम के साथ डॉ ओम प्रकाश मिश्र मधुब्रत के अभिनंदन ग्रंथ का विमोचन भी किया। विमोचनकर्ता टीम में डाॅ. वाई एस पाण्डेय के साथ साथ कथा व्यास आदरणीय विद्यार्थी जी, वरिष्ठ कवि पंडित रामजी मिश्र चित्रकार जी, कवि राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय “गड़बड़ प्रतापगढ़ी” विशिष्ट अतिथि आचार्य बद्री नारायण मिश्र जी ,श्री श्याम शंकर त्रिपाठी जी , श्री ज्ञान चंद्र मिश्र जी एवं आदरणीय पाठक जी समेत अनेकानेक गणमान्य लोगों ने सहभागिता दी।

इस अवसर पर सुदूर कई जनपदों से लोग पधारे हुए थे। साथ ही आसपास के संभ्रांत गणमान्य लोग साक्षी भाव से उपस्थित रहे।

कथा का समापन देर तक चलता रहा । लोग मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण एवं संकीर्तन में संलग्न रहे। कथा के बाद आरती एवं प्रसाद वितरण एवं जलपान के बाद लोग अपने अपने घर प्रस्थान किए।