आज की प्रार्थना- सुरेश जोशी

🕉️🙏नमस्ते जी 🙏🕉

दिनांक – – ०६ नवम्बर २०२६ ईस्वी

दिन – – शुक्रवार

🌘 तिथि– द्वादशी ( १०:३० तक तत्पश्चात त्रयोंदशी )

🪐 नक्षत्र – – हस्त ( २८:४३ तक तत्पश्चात चित्रा )

पक्ष – – कृष्ण
मास – – कार्तिक
ऋतु – – शरद
सूर्य- – दक्षिणायने

🌞 सूर्योदय – – प्रातः ६:३७ पर दिल्ली में
🌞 सूर्यास्त – – सायं १७:३३ पर
🌘चन्द्रोदय — २८:४३ पर
🌘चन्द्रास्त – – १५:३१ पर

सृष्टि संवत् – – १,९६,०८,५३,१२७
कलयुगाब्द – – ५१२७
विक्रम संवत् – -२०८३
शक संवत् – – १९४८
दयानंदाब्द – २०२

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🚩‼️ओ३म्‼️🚩

🔥प्रार्थना!
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ओ३म त्वमेकं शरण्यं त्वमेकं वरेण्यम्,त्वमेकं जगत्पालकं स्वप्रकाशम्। त्वमेकं जगत्कर्त्तृं पातृ प्रहर्त्तृ, त्वमेकं परं निश्चलं निर्विकल्पम्।

हे परमानन्देशवर ! संसार में तू ही एकमात्र शरण में जाने योग्य स्थान है तू ही एकमात्र वरण करने योग्य है।तुझ एकमात्र जगत् के पालक, स्वयं प्रकाशक, रक्षा तथा प्रलय करने वाले, अचल अपरिवर्तनशील को मेरा नमस्कार स्वीकार हो।

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाशादि पंचभूतों को समान करके, हे प्रभु! आपने क्या ही सुन्दर सृष्टि बनाई है ।

हे परमदेव परमात्मा! हे निराश्रय के परम आश्रय ! हम जीवन की बाधा, निराशा और उलझनों से पार जा सकें, जीवन में उन्नति के उच्च शिखरों को छू सकें । अपने कुल का नाम रोशन कर सकें, अपने देश का नाम इतिहास के पृष्ठों में अमर कर सकें।

हे सर्वव्यापी प्रभु! विश्व मे हमारा नाम सम्मान, श्रद्धा और गौरव से लिया जा सकें। हम बाधाओं के बीच से रास्ता निकाल सकें। उलझनों को सुलझा सकें और साथ हि इसी जीवन में समाधान सफलता और सम्यक सार तत्व को प्राप्त कर सकें, ऐसी उत्तम सामर्थ से हमें भर दे प्रभु! यह हमारी आपसे विनती है, प्रार्थना है, इसे स्वीकार कीजिए।

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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇
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🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏

(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮

ओ३म् तत्सत् श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे
कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- एकशत सप्तविंशति:( १,९६,०८,५३,१२७ ) सृष्ट्यब्दे】【 द्विसहस्रत्र्यशीतितम: ( २०८३) वैक्रमाब्दे 】 【 द्वियधिकद्विशतम् ( २०२) दयानन्दाब्दे, रौद्र -संवत्सरे, रवि- दक्षिणायने , शरद -ऋतौ, कार्तिक – मासे, कृष्ण – पक्षे , द्वादश्यां- तिथौ, हस्त
– नक्षत्रे, शुक्रवासरे
, शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर भगते, भारतवर्षे भरतखंडे…प्रदेशे…. जनपदे…नगरे… गोत्रोत्पन्न….श्रीमान .( पितामह)… (पिता)…पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)…अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे

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