समाजसेवा से सियासत तक सुरेश यादव का सफर, अयोध्या विधानसभा सीट पर संभावित दावेदारी से गरमाई राजनीति
महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या की सियासत में इन दिनों ‘समाजसेवी संस्थान अयोध्या धाम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश यादव का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। लंबे समय से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय सुरेश यादव की अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से संभावित दावेदारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। समाजसेवा के बल पर बनाई जमीनी पहचान सुरेश यादव की पहचान मुख्य रूप से एक समर्पित समाजसेवी की रही है। उन्होंने क्षेत्र में जरूरतमंदों की मदद, बेटियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से साइकिल वितरण, गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग तथा वंचित वर्गों तक सीधी सहायता पहुंचाने जैसे कई कल्याणकारी कार्य किए हैं। स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं और प्रशासनिक मुद्दों पर वे लगातार मुखर रहे हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विरासत
अयोध्या विधानसभा क्षेत्र की तिहूरा ग्रामसभा के निवासी सुरेश यादव का परिवार लंबे समय से स्थानीय राजनीति और समाजसेवा में सक्रिय रहा है:
पिता: स्वर्गीय भदई यादव (पूर्व ग्राम प्रधान) माता श्रीमती कैलाश देवी (पूर्व ग्राम प्रधान) भाई रामकरण यादव (वर्तमान ग्राम प्रधान) पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच सुरेश यादव ने समाजसेवा को अपना मुख्य माध्यम बनाकर क्षेत्र में एक अलग और विश्वसनीय पहचान बनाई है। 2027 के समीकरण और राजनीतिक प्रभाव अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव के दौरान विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं और बिजली व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दे अहम रहने वाले हैं। ऐसे में सुरेश यादव की सामाजिक पकड़ को यदि राजनीतिक धरातल मिलता है, तो यह बसपा के लिए एक मजबूत दांव साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुरेश यादव के नाम पर आधिकारिक मुहर लगाती है, तो अयोध्या विधानसभा सीट का समीकरण काफी दिलचस्प और निर्णायक रूप ले सकता है। फिलहाल, समाजसेवा से सियासत के मोड़ पर खड़े सुरेश यादव की प्राथमिकताओं और बसपा के अंतिम फैसले पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।