लखनऊ। शहर में पालतू कुत्तों के लाइसेंस को लेकर नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में शनिवार सुबह जोन-3 के अलीगंज सेक्टर जे, सेक्टर एल और महानगर के आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया गया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर सुबह 6:30 बजे शुरू हुए अभियान में बिना लाइसेंस कुत्ता पालने वालों की जांच की गई। नगर निगम की पशु कल्याण टीम के साथ प्रवर्तन दल और डॉग कैचिंग स्क्वाड के कर्मचारी भी मौजूद रहे।नगर निगम के अनुसार, अभियान के दौरान बिना लाइसेंस कुत्ता पालने के मामलों में चार लोगों से कुल 2,000 रुपये जुर्माना वसूला गया। इसके साथ ही मौके पर चार नए लाइसेंस भी बनाए गए। निगम की ओर से जारी जानकारी में कुल 24,000 रुपये नगर निगम कोष में जमा होने की बात कही गई है। जांच के दौरान कई ऐसे पालतू कुत्ते भी मिले, जिनका लाइसेंस बना हुआ था और टीकाकरण भी पूरा था।नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में लगभग 10,000 पालतू कुत्ते हैं, जबकि अब तक करीब 3,400 लाइसेंस ही जारी किए गए हैं। नगर निगम का कहना है कि अभियान का उद्देश्य पालतू कुत्तों का पंजीकरण बढ़ाने के साथ सार्वजनिक सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना है।नगर निगम के नियमों के अनुसार, पालतू कुत्ते का लाइसेंस बनवाने के लिए रेबीज टीकाकरण प्रमाणपत्र और पालतू पशु अनुज्ञप्ति, नियंत्रण तथा विनियमन उपविधि-2025 के पालन संबंधी शपथपत्र आवश्यक है। इच्छुक लोग नगर निगम की वेबसाइट lmc.up.nic.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा लालबाग स्थित पशु कल्याण अधिकारी कार्यालय में भी लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदन किया जा सकता है।नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम ने विभिन्न क्षेत्रों में पशु चिकित्सालयों और निजी पशु चिकित्सा केंद्रों पर भी लाइसेंस बनवाने की व्यवस्था की है। इनमें गोमतीनगर के विवेक खंड स्थित डॉग एंड पप्स, ग्वारी गांव स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय, इंदिरानगर के पी.यू.पी.एस., बीबी सिंह मेमोरियल विकास पेट केयर और पेट केयर, सदर स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय, विकासनगर स्थित डॉ. हस पेट क्लिनिक, गोमतीनगर का रॉयल पेट क्लिनिक, कानपुर रोड स्थित पेट मेडिकल हॉस्पिटल और एलडीए कॉलोनी का शुक्ला वेटरिनरी क्लिनिक शामिल हैं।पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि अभियान के जरिए लोगों को पालतू कुत्तों का लाइसेंस बनवाने और रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैध एंटी रेबीज टीकाकरण प्रमाणपत्र की जांच के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। डॉ. वर्मा ने सभी पालतू कुत्तों के मालिकों से समय पर टीकाकरण कराने, अनिवार्य रूप से लाइसेंस बनवाने और कुत्तों को टहलाते समय मजबूत पट्टे का इस्तेमाल करने की अपील की।