कैबिनेट सचिवालय, भारत सरकार के अपर सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने ग्राम पंचायत घुमनाभारू का किया भ्रमण
महिला स्वयं सहायता समूहों के द्वारा संचालित सामुदायिक मॉडल एग्री-पीवी प्लांट का किया निरीक्षण
सामुदायिक मॉडल एग्री-पीवी प्लांट को बताया ‘‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’’
सिंचाई लागत 200 रू. प्रति घंटा से घटकर हुई रू. 60=00 प्रति घंटा
बहराइच 15 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच के विकासखंड मिहींपुरवा की ग्राम पंचायत घुमनाभारू में स्थापित कृषि फोटोवोल्टाइक (एग्री-पीवी) प्लांट ग्रामीण विकास एवं आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि एवं महिला सशक्तीकरण को एकीकृत करने वाली अद्वितीय पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। देशभर में संचालित नवीन विचारों, अभिनव सामुदायिक मॉडलों एवं विकास संबंधी पहलों को समझने के क्रम में इस प्लांट का चयन किया गया। कैबिनेट सचिवालय, भारत सरकार के अपर सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेस (एनसीजीजी) के यंग प्रोफेशनल गणेश महालावत के साथ बुधवार को ग्राम पंचायत घुमनाभारू का भ्रमण कर महिला स्वयं सहायता समूहों के नेतृत्व में संचालित सामुदायिक मॉडल एग्री-पीवी प्लांट का विस्तृत निरीक्षण किया।
अपर सचिव श्री तिवारी के भ्रमण का मुख्य उद्देश्य प्लांट की विशिष्ट तकनीकी संरचना, जटिल डिजाइन, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था, संचालन प्रक्रिया तथा स्थानीय समुदाय द्वारा इसके प्रबंधन के मॉडल को समझना था। भ्रमण के दौरान श्री तिवारी द्वारा प्लांट से संबंधित उपलब्ध डेटा एवं अभिलेखों का अवलोकन किया, सिंचाई व्यवस्था से जुडे सभी आउटलेट एवं मोटरों को चलाकर उनकी कार्यशीलता का प्रत्यक्ष परीक्षण किया तथा सामुदायिक समिति के सदस्यों के साथ प्लांट के संचालन एवं प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई।
अपर सचिव ने प्लांट की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्यावरण अनुरूप एवं ग्रीन ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है जो महिलाओं के नेतृत्व क्षमता का अद्भुत उदाहरण पेश करता है। इसने न सिर्फ कृषि के लिए वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तुत की है बल्कि गांव में ऊर्जा की पहुंच स्थापित कर ग्रामीण रोजगार के लिए नए अवसर की संभावनाओं को भी प्रस्तुत किया है। साथ ही विदेशी आयातित ऊर्जा (डीजल) की निर्भरता को कम करते हुए भारत व गांव की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया है। इस पहल की विशिष्टता को रेखांकित करते हुए उन्होंने प्लांट को रेगिस्तान में नखलिस्तान (ओएसिस इन ए डेज़र्ट) के रूप में संबोधित किया। यह अभिव्यक्ति स्थानीय परिस्थितियों में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था की उपयोगिता और ग्रामीण समुदाय के लिए इसके महत्व को दर्शाती है।
एग्री-पीवी तकनीक टीआरआई और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की साझेदारी में विकसित सामुदायिक पहल है। जिसमें कृषि और सौर ऊर्जा को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ जोड़ा गया है। यह प्लांट सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था के माध्यम से किसानों की कृषि संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग प्रदान करता है। लगभग 43 किलोवाट क्षमता वाला यह प्लांट 10 सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से करीब 100 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई में सहयोग देता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सिंचाई के लिए डीजल पर निर्भरता कम करना, किसानों की लागत घटाना और स्थानीय स्तर पर सिंचाई सेवाओं को सुलभ बनाना है। इस पूरी पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका समुदाय आधारित संचालन मॉडल है। इस मॉडल में महिलाएं केवल योजना की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि प्लांट के संचालन, प्रबंधन और सिंचाई सेवाओं से जुडी जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इस पहल ने न सिर्फ डीजल इंजन पर निर्भरता को कम किया है बल्कि उपलब्ध विवरण के अनुसार इस पहल ने कृषि क्षेत्र में सिंचाई लागत को रू. 200=00 प्रति घंटा से घटाकर रू. 60=00 प्रति घंटा तक कर दिया है। साथ ही कृषि विविधीकरण और उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
इस महत्वपूर्ण भ्रमण में भारत सरकार, जिला एवं विकासखंड प्रशासन, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया तथा प्लांट की स्थापना करने वाली कार्यान्वयन एजेंसी ग्राम ऊर्जा के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इस मौके पर उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मुख्यालय उपायुक्त देवेंद्र कुमार ओझा, उपायुक्त स्वतः रोजगार धनंजय सिंह, उपजिलाधिकारी मोतीपुर सुश्री मोनालिसा जोहरी, खंड विकास अधिकारी मिहींपुरवा विजय कुमार सिंह, ए.डी.ओ. आईएसबी आशुतोष समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) की ओर से राजीव त्रिपाठी व संस्था के अन्य सदस्य तथा ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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