कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण का समापन, 25 युवाओं ने सीखे स्वरोजगार के गुर
मशरूम उत्पादन से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर : डॉ. पी.के. मिश्रा
लवकुश सिंह संवाददाता
अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती
बस्ती । आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में मशरूम उत्पादन तकनीक पर आयोजित पांच दिवसीय रोजगारपरक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। पांच से नौ अक्टूबर तक आयोजित यह प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-III, कानपुर से वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत संपन्न हुआ। इसमें जनपद के विभिन्न ब्लॉकों के 25 युवक-युवतियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन अवसर पर केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि मशरूम उत्पादन ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आजीविका मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर अपने गांवों में मशरूम उत्पादन को व्यवसाय के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं वैज्ञानिक डॉ. प्रेम शंकर ने प्रतिभागियों का प्रशिक्षणोपरांत मूल्यांकन किया। उन्होंने बटन मशरूम उत्पादन की तकनीक, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन का चयन, भूसे का उपचार एवं पाश्चुरीकरण, बैग तैयार करने, स्पॉनिंग, इनक्यूबेशन, फलन तथा कीट-रोग प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन कृषि गतिविधि के साथ-साथ ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
वैज्ञानिक डॉ. वी.बी. सिंह ने मशरूम की उपयुक्त प्रजातियों के चयन, गुणवत्तापूर्ण स्पॉन की पहचान और उत्पादन एवं उपज में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, गृह विज्ञान की वैज्ञानिक डॉ. अंजलि वर्मा ने मशरूम के पोषक तत्वों, सुरक्षित प्रसंस्करण एवं भंडारण तथा मशरूम पाउडर, अचार, नमकीन जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने के साथ महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
कृषि प्रसार के वैज्ञानिक आर.वी. सिंह ने मशरूम उत्पादन के जरिए पोषण, रोजगार और आय सृजन की संभावनाओं पर जोर दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उत्पादन की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों के साथ लागत-लाभ का आकलन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, स्थानीय बाजार से जुड़ाव और उद्यम स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र तथा रंगीन आम की पौध वितरित की गई। आयोजकों ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में अर्जित कौशल के माध्यम से अपने गांवों में मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित करने, परिवार की आय बढ़ाने और अन्य ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की अपील की।