अयोध्या में हिंदी दिवस पर भव्य संगोष्ठी: वैश्विक संपर्क भाषा और राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी की अनिवार्यता पर जोर

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय वैदिक रामायण एवं शोध संस्थान (तुलसी स्मारक भवन) में हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी, सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अपर आयुक्त प्रशासन श्री अजय कांत सैनी ने कहा, “वैश्विक मजबूरियाँ और आवश्यकताएँ ही हिंदी को विश्व की संपर्क भाषा बनाएंगी। मातृभाषा से ही हमारे देश की अस्मिता की पहचान है और हिंदी के बिना संपूर्ण एवं समृद्ध राष्ट्र की कल्पना अधूरी है।मुख्य वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम का विधिवत दीप प्रज्ज्वलन कर उद्घाटन करते हुए विशिष्ट अतिथि नगर सहायक आयुक्त ज्वाला प्रसाद यादव ने कहा कि हिंदी से ही देश का समग्र विकास संभव है। अब समय आ गया है कि हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए।
भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता परमानंद मिश्रा एवं मंडल अध्यक्ष मुकेश तिवारी ने कहा कि वर्तमान सरकार हिंदी को विशेष महत्व दे रही है और यदि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया जाए, तो देश में विकास की प्रक्रिया और अधिक तीव्र हो जाएगी।
“हिंदी के बिना सशक्त भारत की परिकल्पना अधूरी” – शरद पाठक बाबा संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी व मित्र मंच के प्रमुख शरद पाठक “बाबा” ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि हिंदी के बिना देश की कोई ठोस पहचान नहीं बन पाएगी तथा एक समृद्ध व सशक्त भारत की परिकल्पना अधूरी ही रहेगी। समाजसेवी सुरेश यादव ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि सभी समाजसेवियों को मिलकर एक महाअभियान के तहत हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए एकजुट होना होगा। काव्य पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि शैलेंद्र पांडेय “मासूम” के नेतृत्व में कवियों ने शानदार काव्य पाठ कर साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य पाठ करने वाले प्रमुख रचनाकारों में वंदना सिंह, अंतिमा तिवारी, मधु उपाध्याय, संतोष सिंह, कोमल कर्कश, सुनीता पाठक, विश्व विजय प्रताप सिंह और लक्ष्मी पांडेय शामिल रहे।
संचालन एवं आभार समारोह का कुशल संचालन संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सम्राट अशोक मौर्य ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए अयोध्या में हिंदी की गतिविधियों को धार देने के लिए एक ‘हिंदी भवन’ की विशेष आवश्यकता पर जोर दिया, जिसके माध्यम से हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कराने की मुहिम को और बल मिल सके।
संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह “वत्स” ने कहा कि हिंदी के राष्ट्रभाषा बने बिना भारत देश गूंगे के समान है। संरक्षक मंडल सदस्य व ‘साहित्य सम्राट’ पत्रिका के सह-संपादक राम केर सिंह ने कहा कि हिंदी को पूर्ण रूप से आत्मसात किए बिना देश की वास्तविक प्रगति असंभव है। जनमोर्चा के वरिष्ठ पत्रकार सूर्य नारायण सिंह ने कहा कि हम सभी को एक परिवार की तरह अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करना होगा।
उत्कृष्ट सम्मान और सहभागिता
इस अवसर पर समाज के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लगभग सैकड़ों साहित्य प्रेमियों और विशिष्ट जनों को प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करने वाले प्रमुख लोगों में विंध्यवासिनी शरण पांडिया, सावित्री मिश्रा, ओमप्रकाश सोनी, आचार्य स्कंद दास, सुमित्रानंदन यादव, प्रिया श्रीवास्तव, सरोज यादव, दीपचंद राही, मीना सिंह, लाल मनीष प्रताप सिंह, डॉ. चंद्रगुप्त मौर्य, उर्मिला मौर्य, आचार्य शशि मौर्य, डॉ. सम्राट श्री कृष्ण मन मोहन मौर्य, अनामिका सम्राट, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मौर्य, शशिकला मौर्य, बृजेश सेन, रेनू गुप्ता, नरेंद्र पाठक, साध्वी मनीषा पांडेय और नीलम सिंह आदि शामिल रहे। कार्यक्रम में अधिवक्ता अशोक पांडेय, संतोष कुमार वर्मा, डॉ. अनुराधा मौर्य, संजय यादव, सी.ए. चक्रवर्ती मौर्य, सिद्धार्थ श्रीवास्तव, आलोक निगम, संतोष तिवारी, माधव राज सिंह, अजय श्रीवास्तव “अज्जू”, बलराम मौर्य, डॉ. एस.पी. द्विवेदी, डॉ. सोनी शर्मा, अनिरुद्ध प्रसाद शुक्ला, रागिनी सिंह, मुजामिल फिदा हुसैन और रूबे प्रताप मौर्य सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।