अयोध्या में दशलक्षण पर्व का शुभारंभ सुबह निकाली गई भव्य शोभायात्रा, गूंजे सत्य-संयम और त्याग के जयकारे

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। सत्य, संयम, शुद्धता, तप और त्याग जैसे शाश्वत जीवन मूल्यों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ मंगलवार को अयोध्या के दिगंबर जैन मंदिर में 11 दिवसीय पर्यूषण (दशलक्षण) पर्व का पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर सुबह 7:00 बजे बाजे-गाजे के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के तमाम श्रद्धालु और श्रावक बड़ी संख्या में शामिल हुए। जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है मोक्ष की प्राप्ति
पर्यूषण पर्व जैन दर्शन के उस मूल भाव को जीवंत करता है, जिसमें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति यानी मोक्ष को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। आगामी 11 दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान के दौरान साधक और श्रद्धालु इन 10 पवित्र धर्मों की साधना करेंगे क्षमा और मार्दव मन में कोमलता और क्षमा भाव रखना। आर्जव और सत्य जीवन में सरलता और सदा सत्य बोलना। शौच और संयम आंतरिक-बाहरी पवित्रता और इंद्रिय नियंत्रण। तप और त्याग साधना करना और मोह-माया का परित्याग। आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य अकिंचन भाव और उच्च आचरण। श्रद्धालु इन मूल्यों को केवल पूजा-विधान तक सीमित न रखकर अपने दैनिक आचरण में उतारने का संकल्प ले रहे हैं।
मोक्ष प्राप्ति के लिए मूल्यों को आत्मसात करना जरूरी रवींद्रकीर्ति दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र सहित अनेक प्रमुख जैन तीर्थों के पीठाधिपति रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि पर्यूषण पर्वआत्म-शुद्धि, आत्म-चिंतन और मन के मैल को धोने का सबसे बड़ा अवसर है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए इन शाश्वत मूल्यों को केवल किताबी ज्ञान न मानकर जीवन में आत्मसात करना बेहद जरूरी है।इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और प्रवचनमाला का आयोजन किया जा रहा है, जिससे संपूर्ण अयोध्या नगरी जैन धर्म की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी है।