भरतकुंड में 12 साल बाद भव्य रामलीला का होगा आयोजन, संत परमात्मा दास महाराज के सानिध्य में सजेगा मंच

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर होगा रामलीला और रावण दहन का ऐतिहासिक आयोजन, दूर-दूर से जुटेंगे संत-महात्मा और कलाप्रेमी।
अयोध्या (विशेष संवाददाता):
भगवान श्री राम की तपोभूमि और भरत जी की साधना स्थली के रूप में विख्यात ऐतिहासिक ‘भरतकुंड’ में एक बार फिर 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भव्य रामलीला का मंचन होने जा रहा है। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन को लेकर क्षेत्र के संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह का माहौल है। रामलीला का यह पावन आयोजन संत परमात्मा दास महाराज के पावन सानिध्य और नेतृत्व में संपन्न होगा।
सनातन संस्कृति और तपोभूमि का पुनर्जागरण इस संबंध में जानकारी देते हुए संत परमात्मा दास महाराज ने बताया कि भरतकुंड वह पावन स्थान है जहां प्रभु भरत ने भगवान श्री राम के वियोग में 14 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी और उनकी खड़ाऊं रखकर अयोध्या का राजकाज संभाला था। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता की लंबे समय से यह इच्छा थी कि इस पवित्र तपोभूमि पर एक बार फिर पारंपरिक और भव्य रामलीला का आयोजन हो। महाराज जी का मुख्य उद्देश्य हमारी सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाना और नई पीढ़ी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से अवगत कराना है।
प्रमुख कार्यक्रम और तिथियाँ
शारदीय नवरात्रि: मां दुर्गा की स्थापना और पूजन के साथ उत्सव का शुभारंभ।
रामलीला की शुरुआत: आगामी 11 अक्टूबर से विधिवत रामलीला का मंचन शुरू होगा।
रावण दहन एवं मिलाप: 21 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन पर्व पर रावण दहन तथा त्रेतायुग के ऐतिहासिक प्रसंग पर आधारित ‘राम-भरत मिलाप’ का भव्य आयोजन किया जाएगा।
देशभर से जुटेंगे साधु-संत और कलाकार इस महाआयोजन में सम्मिलित होने के लिए देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से संत-महात्माओं, कथा वाचकों और प्रसिद्ध भजन गायकों का आगमन हो रहा है। इसके साथ ही दिल्ली, बिहार और अन्य प्रांतों से कई प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने पहुंच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन से भी इस विशाल आयोजन को लेकर पूरा सहयोग प्राप्त हुआ है।
आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश । संत परमात्मा दास महाराज ने समाज के नाम संदेश देते हुए कहा कि आज के समय में परिवारों और भाइयों के बीच विवाद बढ़ रहे हैं, जिन्हें शांत करने की आवश्यकता है। भगवान श्रीराम और भरत जी का चरित्र हमें त्याग, प्रेम और भाईचारे की अद्वितीय सीख देता है। यदि लोग रामलीला देखकर अपने जीवन में इन आदर्शों को उतारें, तो समाज में व्याप्त कटुता समाप्त हो सकती है और हम सब सनातन परिवार के रूप में एकजुट रह सकते हैं।