

🌴🌴ओ३म्🌴🌴
*विद्यालयों में ब्रह्म विद्या अनिवार्य हो!*

जनपद महर्षि वशिष्ठ नगर [बस्ती] के आर्य समाज मंदिर न ई बाजार बस्ती के तत्वाधान में *ब्रह्मविद्या सेमिनार* का आयोजन किया गया।जिसका उद्देश्य बालक-बालिकाओं को *रोजगार परक शिक्षा से ऊपर उठकर चारित्रिक निर्माण करना विशेष था!* वर्तमान शिक्षा से जो बालक-बालिकायें निकल रही हैं उनका एकमात्र लक्ष्य रोटी-कपड़ा मकान तक सीमित हो गया है।आज के बालक जो भी उच्च शिक्षा ले रहे हैं चाहे वो *डाक्टर , इंजीनियर, सीए, पीए,आदि की हो उसके पीछे का स्वार्थ उच्च वेतन व हाई-फाई जीवन शैली मात्र है।* इसका परिणाम यह है कि जब बालक/बालिकायें किसी कारण असफल होते हैं तो *या तो आत्महत्या कर रहे हैं या अनसन कर रहे हैं या उग्र आंदोलन कर राष्ट्रीय संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं।* इस समस्या का समाधान देते हुए बाराबंकी से पधारे वैदिक प्रवक्ता आचार्य सुरेश जोशी ने कहा सरकारों को चाहिए कि *प्राथमिक विद्वालयों से लेकर महाविद्यालयों व विश्व विद्यालयों में *ब्रह्मविद्या का व्यवस्थित पाठ्यक्रम हो!* इन विद्यालयों से निकलने वाले छात्र व छात्रायें केवल *वेतन भोगी न होकर मातृ-पितृ,आचार्य,राष्ट्र भक्त,समाज सेवक के साथ ईश्वर भक्त* भी होंगे!
*🔴क्या है ब्रह्मविद्या?*🔴
सेमिनार को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने ब्रह्मविद्या क्या है? इस पर विस्तार से *छात्र/छात्राओं,शिक्षक/शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। आपने बताया कि *प्रात:काल शीघ्र उठना,ऊषापान करना,व्यायाम-आसन-प्राणायाम कर शरीर बलवान व ऊर्जावान करना ।माता-पिता-आचार्य बृद्ध जनों को प्रणाम करना,उनकी तन-मन-धन से सेवा कर उनसे आशीर्वाद लेकर चरित्र बल व आत्मबल को धारण करना ,इसके साथ ही सेवा,परोपकारर,दया,सयंम,ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए ओम्,गायत्री मंत्र का ध्यान करके ईश्वर से आत्माज्ञान,आत्मविश्वास,धैर्य,साहस हेतु प्रार्थना करना ब्रह्मविद्या के अनेकों अध्याय व आयाम हैं।*
आचार्य श्री ने कहा यदि भारत सरकार ब्रह्मविद्या को पाठ्यक्रम में अनिवार्य कर दें तो प्रत्येक पच्चीस [२५] वर्ष में जो स्नातक महाविद्यायों,विश्वविद्यालयों,आई-आई टैक्निकल संस्थानों से जो युवक-युवतियां निकलेंगी *वो नौकरी,पद,अधिकार मांगने वाले नहीं देने वाले,स्वावलंबी व राष्ट्र का नेतृत्व* करने वाले होंगे।अत: विद्या मंदिर में ब्रह्मविद्या का पाठ्यक्रम अनिवार्य हो।
स्वामीदयानंद माध्यमिक विद्यालय के यशस्वी प्रबंधक आदरणीय *ओमप्रकाश आर्य विगत तीस वर्षों से प्रतिवर्ष वैदिक विद्वानो को आमंत्रित कर समय-समय पर ब्रह्मविद्या के समिनार* लगाकर राष्ट्र को अपनी अनवरत सेवा देने में अहर्निश पुरुषार्थ करते है।इस वर्ष भी साप्ताहिक वेदकथा के पावन अवसर *प्रतिदिन प्रात:काल पहली कक्षा ब्रह्मविद्या* की चलाते हैं।
🟣*वैदिक भजन*🟣
बाराबंकी से पधारी वैदिक भजनोपदेशिका रुक्मिणी शास्त्री जी बच्चों को *ईश्वर,राष्ट्र व चेतना गीतों* को सुनाकर बालक-बालिकाओं में ब्रह्मविद्या का बीजारोपण करती हैं।
*कार सेवा मंडली*
प्रतिदिन इस ब्रह्मविद्या सत्र को व्यवस्थिथ रुप देने वालों में *संयोजक श्री ओम प्रकाश चार्य,प्रचारक मंत्री श्री गरुढ़ ध्वज पांडेय,व्यवस्थापक देवव्रत पुरोहित,संचालक प्रधानाचार्य आदरणीय आदित्य नारायण गिरि व उनकी विद्यालय टीम* है।
*🌹पारिवारिक सत्संग भाग-४*🌹
आज का सत्संग *श्रीमान दिलीप व श्रीमान राजेंद्र जी के संयुक्त परिवार* में सम्पन्न हुआ।जिसमें विद्वानों द्वारा *अग्निहोत्र,वैदिक भजन व वेद प्रवचन किया गया!* इस प्रकार दिनांक 🌻*१२ सितंबर तक*🌻 चलने वाले इस वेदकथा सप्ताह में आप सपरिवार आमंत्रित है।ये कार्यक्रम प्रतिदिन सायंकाल साढ़े छ: बजे से रात्रि नौ बजे तक आर्य समाज मंदिर न ई बाजार बस्ती में प्रायोजित किया जाता है।
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