दिल मसर्रत से भर गया मेरा, उसने जो आज मुस्कुराया है, साहिल प्रतापगढ़ी,,,
अनुराग लक्ष्य, 9 अगस्त
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
हिंदुस्तानी शायरी में हमेशा से ही रूमानियत का अहम रोल रहा है।
जितने भी नए शोअरा हजरात हैं, अपनी शायरी की शुरुआत रूमानियत से ही करते हैं। इन्हीं में एक साहिल प्रतापगढ़ी का भी नाम आता है। आइए आज उनकी ऐसी ही एक ग़ज़ल से हम और आप लुत्फअंदोज़ होते हैं।
*१* – आज मुझको वो फिर रुलाया है,
किस्सा-ए-ग़म कोई सुनाया है ।
*२-* बैर आंधी को है उजालों से,
लौ चिरागों की जो बुझाया है ।
*३* – हिचकियाॅं उनको आ रही होंगी,
याद मुझको वो फिर से आया है ।
*४* – दिल मसर्रत से भर गया मेरा,
उसने जो आज मुस्कुराया है ।
*५* – आंख वो तो मुझे दिखाता है,
आईना जब उसे दिखाया है ।
*६* – अब तेरी बेरुखी यूॅं लगती है,
चोट पत्थर से जैसे खाया है ।
*७* – खुशबुओं में बड़ा मुअत्तर है,
कौन सा इत्र तू लगाया है ।
*८* – ये नशा है जो तेरी आंखों का,
अब तलक मुझपे यार छाया है ।
*९* – इतना समझो कि यह जहाँ साहिल,
सिर्फ़ इंसाँ की मोह माया है।