मुस्कुराने का क़ायदा सीखो

ग़ज़ल

मुस्कुराने का क़ायदा सीखो
ज़िंदगानी का फ़लसफ़ा सीखो

चारागर हो, यही नहीं काफ़ी
कैसे दी जाए है दवा, सीखो

तुमको क्या ख़ाक इश्क़ आता है
जाओ जाओ कहीं वफ़ा सीखो

राज करना हो गर दिलों पर तो
दिल लुभाने की कुछ अदा सीखो

अच्छी बातें बहुत हैं दुनिया में
क्या ज़ुरूरी है कुछ बुरा सीखो

ग़ज़ल ©डॉ कविता”किरण”