मेरठ में नकली दवा बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, छह लाख कैप्सूल और अवैध निर्माण नेटवर्क का खुलासा

लखनऊ, । प्रदेश में आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने तथा नकली और अवैध दवाओं के कारोबार पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेरठ, बागपत और उत्तराखंड तक फैले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। विभाग की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर नकली दवा तैयार करने के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में यह भी सामने आया कि पोषण संबंधी पूरक के रूप में बनाए जाने वाले कैप्सूलों को अवैध तरीके से दवा के रूप में तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा था। मामले में चार आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को 24 जुलाई को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर सहायक आयुक्त (औषधि) मेरठ मंडल के नेतृत्व में औषधि निरीक्षकों तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मेरठ जनपद के इंचोली थाना क्षेत्र स्थित खरदौनी शेखपुर गांव में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मौके से दवाओं की पत्ती तैयार करने वाली मशीन, हवा का दबाव बनाने वाली मशीन तथा पैकिंग में प्रयुक्त अन्य उपकरण बरामद किए गए।जांच में सामने आया कि रुद्रपुर स्थित एक औषधि प्रतिष्ठान तथा विकास चौहान और उसके सहयोगी राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण कुंडा की मिलीभगत से प्रसिद्ध दवा के नाम और लेबल का दुरुपयोग किया जा रहा था। आरोप है कि केवल पोषण संबंधी उपयोग के लिए बनाए जाने वाले विटामिन-ई की कम मात्रा वाले कैप्सूलों को अवैध रूप से तैयार कर अधिक मात्रा वाली औषधि के रूप में पैक किया जाता था और उन्हें बाजार में दवा बताकर बेचा जा रहा था।जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए विभाग की टीम ने अगले दिन उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित संबंधित औषधि प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। इसके बाद बागपत जनपद के खेकड़ा क्षेत्र स्थित निर्माण इकाई पर भी छापेमारी की गई।जांच में पता चला कि संबंधित निर्माण इकाई के पास केवल खाद्य सुरक्षा मानकों के अंतर्गत पोषण संबंधी पूरक पदार्थ और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद बनाने का लाइसेंस था। नियमों के अनुसार वह केवल पोषण संबंधी उपयोग के लिए विटामिन-ई की कम मात्रा वाले कैप्सूल ही बना सकती थी, लेकिन इसके बावजूद उसने नियमों का उल्लंघन करते हुए लगभग छह लाख बिना पैकिंग वाले कैप्सूल रुद्रपुर स्थित प्रतिष्ठान को उपलब्ध कराए।इसके बाद इन कैप्सूलों को अवैध रूप से संसाधित कर प्रसिद्ध औषधि के नाम से पैक किया जाता था और चिकित्सकीय उपयोग की दवा बताकर बाजार में आपूर्ति की जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि खाद्य सुरक्षा संबंधी लाइसेंस का दुरुपयोग करते हुए नकली दवा तैयार करने और उसकी बिक्री के लिए एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी विकास चौहान, उसके सहयोगी राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण कुंडा, रुद्रपुर स्थित औषधि प्रतिष्ठान के संचालक रोहित कुमार तथा बागपत स्थित निर्माण इकाई के निदेशक एवं उत्तरदायी व्यक्ति अमृत पटेल के विरुद्ध मेरठ के इंचोली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग का कहना है कि आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी तथा ऐसी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।