योगी सरकार की MIDH (एकीकृत बागवानी विकास मिशन) योजना से बदली किसान की तकदीर, नेट हाउस/पॉली हाउस खेती से दोगुनी हुई आय
*अंबेडकरनगर के प्रगतिशील किसान रामजनम वर्मा बने मिसाल, 50% अनुदान से अपनाई संरक्षित खेती, पहले ही चक्र में 3.60 लाख रुपये की शुद्ध आय*
*पॉली हाउस/नेट हाउस तकनीक ने बदली किसान रामजनम वर्मा की तकदीर*
*मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के माध्यम से आधुनिक खेती की ओर एक सफल कदम*
अंबेडकरनगर, 11 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के लिए संचालित योजनाएं अब धरातल पर सकारात्मक बदलाव की तस्वीर पेश कर रही हैं। उद्यान विभाग की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना का लाभ लेकर अयोध्या मंडल के जनपद अम्बेडकरनगर के विकास खंड अकबरपुर के अंतर्गत ग्राम अलावलपुर के प्रगतिशील किसान रामजनम वर्मा पुत्र बुद्धू , आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाना चाहते हैं। वर्षों तक पारंपरिक खेती करने वाले रामजनम वर्मा को मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत, कीट एवं रोगों के प्रकोप तथा उत्पादन में उतार-चढ़ाव जैसी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। मेहनत के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था, जिससे खेती केवल जीविकोपार्जन का साधन बनकर रह गई थी।
इसी दौरान उद्यान विभाग द्वारा संचालित “मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)” योजना की जानकारी उन्हें प्राप्त हुई। विभागीय अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक औद्यानिक तकनीकों, संरक्षित खेती (Protected Cultivation) तथा पॉली हाउस/नेट हाउस की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। अधिकारियों के मार्गदर्शन और योजना के अंतर्गत अनुमन्य अनुदान ने रामजनम वर्मा का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने पहली बार दो–दो हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में पॉली हाउस एवं नेट हाउस स्थापित करने का निर्णय लिया। जिसके अंतर्गत पॉलीहाउस में गुलाब तथा नेट हाउस में सब्जी की खेती की गई।
शुरुआत में यह निर्णय चुनौतीपूर्ण था। संरक्षित खेती के लिए प्रारंभिक निवेश सामान्य खेती की तुलना में अधिक था। परंतु MIDH योजना के अंतर्गत 50 प्रतिशत अनुमन्य अनुदान उपलब्ध होने से उनकी आर्थिक चिंता काफी हद तक कम हो गई। जिला उद्यान अधिकारी सहित अन्य विभागीय विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर उन्हें पॉली हाउस की स्थापना, सिंचाई व्यवस्था, पौध प्रबंधन, उर्वरक उपयोग, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा वैज्ञानिक खेती की संपूर्ण जानकारी प्रदान की।
पॉली हाउस 2000 वर्ग मी० में स्थापित होने के बाद श्री वर्मा ने उसमें गुलाब तथा नेट हाउस में खीरे (Cucumber) की खेती प्रारंभ की। पहले जहां खुले खेतों में मौसम की मार के कारण उत्पादन प्रभावित होता था, वहीं पॉली हाउस के नियंत्रित वातावरण में पौधों का विकास बेहतर हुआ। तापमान, नमी एवं कीटों पर नियंत्रण होने से फसल स्वस्थ रही और गुणवत्ता भी पहले से कहीं अधिक बेहतर हुई।
यदि सामान्य खेती की बात करें तो 2000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में लगाए गए नेट हाउस में खीरे की फसल में लगभग 2 लाख रुपये की लागत में उन्हें 10 से 15 टन तक उत्पादन प्राप्त होता था। उत्पादन का अधिकांश भाग स्थानीय खुदरा बाजारों तक ही सीमित रहता था, जिससे आय भी सीमित रहती थी। कुल मिलाकर उन्हें लगभग 1.50 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती थी।
वहीं नेट हाउस/पॉली हाउस तकनीक अपनाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। यद्यपि नेट हाउस की स्थापना पर लगभग 17.20 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें 50 प्रतिशत अनुमन्य अनुदान प्राप्त होगा, जिससे इनका वास्तविक आर्थिक भार काफी कम होगा। संरक्षित खेती में खीरे का उत्पादन बढ़कर 30 से 35 टन तक पहुंच गया, जो सामान्य खेती की तुलना में लगभग दोगुना से अधिक है। बेहतर गुणवत्ता के कारण उनकी उपज को स्थानीय बाजार के साथ-साथ थोक विक्रेताओं एवं खुदरा व्यापारियों दोनों से अच्छी मांग मिलने लगी। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ।
पहले ही उत्पादन चक्र में श्री रामजनम वर्मा को लगभग 3.60 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। यह आय पारंपरिक खेती की तुलना में काफी अधिक रही। इसके साथ ही उन्हें यह विश्वास भी मिला कि वैज्ञानिक एवं संरक्षित खेती भविष्य की कृषि का मजबूत आधार बन सकती है।
इससे प्रभावित होकर उन्होंने 2000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में उक्त योजना के अंतर्गत पॉली हाउस (लागत 29 लाभ में 50 प्रतिशत अनुदान) की स्थापना कर बैज्ञानिक विधि से गुलाब की खेती प्रारंभ की गई। जिससे वर्तमान में गुलाब के फूल का उत्पादन प्रारंभ हो गया है। श्री वर्मा द्वारा बताया गया कि वर्तमान में उत्पादित फूल का बाजार भाव 120 रुपए से 150 रुपये प्रति किलोग्राम प्राप्त हो रहा है और प्रतिदिन 10 से 15 किलोग्राम गुलाब के फूल स्थानीय बाजारों एवं धार्मिक स्थलों पर भेजकर मुनाफा कमाया जा रहा है।
इस प्रकार सरकार द्वारा संचालित इस रोजगारपरक एवं लाभार्थीपरक योजना से लाभान्वित होकर आज श्री वर्मा केवल एक सफल किसान ही नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं। उनके खेत पर आसपास के किसान आधुनिक तकनीक को देखने और समझने के लिए आते हैं। वे अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
उनका मानना है कि खेती में सफलता केवल अधिक मेहनत से नहीं, बल्कि सही तकनीक, उचित मार्गदर्शन और समय पर सरकारी योजनाओं के लाभ से भी मिलती है। नेट हाउस एवं पॉली हाउस तकनीक ने उन्हें मौसम पर निर्भरता से काफी हद तक मुक्त किया है। अब फसल की गुणवत्ता बेहतर रहती है, उत्पादन स्थिर रहता है और बाजार में प्रतिस्पर्धी मूल्य भी प्राप्त होता है।
रामजनम वर्मा की यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाएं किसानों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं। MIDH योजना का उद्देश्य केवल अनुदान देना नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाना है। श्री वर्मा इसका सशक्त उदाहरण हैं।
आज उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ हुई है। खेती से होने वाली बढ़ी हुई आय के कारण वे बेहतर कृषि उपकरण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं आधुनिक सिंचाई व्यवस्था में निवेश कर रहे हैं। साथ ही वे भविष्य में नेट हाउस क्षेत्र का विस्तार कर अन्य उच्च मूल्य वाली सब्जियों एवं उद्यानिकी फसलों की खेती करने की भी योजना बना रहे हैं।
रामजनम वर्मा की सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान नवीन तकनीकों को अपनाने का साहस करें, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं और विभागीय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक खेती करें, तो खेती को घाटे के व्यवसाय से निकालकर लाभदायक उद्यम में बदला जा सकता है। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा न केवल अम्बेडकरनगर बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक, सरकारी सहयोग और दृढ़ संकल्प के साथ कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है।
“रामजनम वर्मा की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब किसान की मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एक साथ जुड़ती हैं, तब खेती केवल आजीविका नहीं बल्कि समृद्धि का माध्यम बन जाती है।”
*डीएम ने किसानों से की योजना का लाभ लेने की अपील*
जिलाधिकारी श्रीमती ईशा प्रिया ने कहा कि “प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने एवं कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है तथा विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) जैसी योजनाएं किसानों को संरक्षित खेती, उच्च गुणवत्ता के उत्पादन एवं बेहतर विपणन के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। जनपद अम्बेडकरनगर के किसान श्री रामजनम वर्मा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लें, तो सीमित संसाधनों में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने जनपद के सभी किसानों से अपील करती हूं कि वे उद्यान विभाग से संपर्क कर आधुनिक खेती की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा कृषि को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने में सहभागी बनें। प्रशासन किसानों को हर संभव तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।”