महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र में तब्दील हो गई है। यहाँ जगद्गुरु जनार्दन स्वामी (मौनगिरिजी) महाराज के आशीर्वाद और उनके उत्तराधिकारी, अध्यात्म शिरोमणि जगद्गुरु स्वामी शांतिगिरिजी महाराज के सानिध्य में ‘ओम जगद्गुरु जनशांति धर्म समारोह’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में देशभर से पधारे संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया है।
मानवता और मानसिक शांति का महायज्ञ पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी रामानंद जी महाराज ने बताया कि यह समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण, मानसिक शांति और समाज में सकारात्मक संस्कारों के बीजारोपण का एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का मानव काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों से घिरा हुआ है। ऐसे में ईश्वर का नामस्मरण और आध्यात्मिक साधना ही मन की शुद्धि और जीवन में वास्तविक शांति का एकमात्र मार्ग है। पांच उपक्रमों से गुंजायमान धर्मनगरी समारोह के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला शुरू की गई है, जिसमें पांच मुख्य उपक्रम शामिल हैं श्रीरामचरितमानस पाठ
अखंड हनुमान चालीसा
विशेष यज्ञ अखंड नंदा दीप
साधनात्मक अनुष्ठान आठ दिवसीय कठिन तपस्या और अखंड नामस्मरण समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ चल रहा ‘अखंड नामस्मरण’ है। ब्रह्मचारी रामानंद जी ने बताया कि एक हजार से अधिक साधक अगले आठ दिनों तक मौन व्रत का कठोर पालन करेंगे। इस दौरान ये साधक केवल फलाहार, दूध या जल ग्रहण कर अपनी तपस्या पूर्ण करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामूहिक नामस्मरण से जो सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, वह व्यक्ति के मन और आसपास के वातावरण को दिव्य बना देती है। अर्धशताब्दी पुरानी सिद्ध परंपरा यह दिव्य परंपरा लगभग 50 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र की धरा से प्रारंभ हुई थी, जिससे अब तक करोड़ों लोग लाभान्वित हो चुके हैं। आयोजन के प्रेरणास्त्रोत जगद्गुरु स्वामी शांतिगिरिजी महाराज का जीवन स्वयं एक तपस्या है। वे विगत 47 वर्षों से फलाहारी हैं और पिछले 9 वर्षों से मौन व्रत का पालन कर रहे हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन में देशभर में 116 आश्रम और 9 गुरुकुल संचालित हैं, जहाँ नई पीढ़ी को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। संतों की गरिमामयी उपस्थिति समारोह के उद्घाटन सत्र में अयोध्या के प्रबुद्ध संतों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसमें मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास और श्री संकटमोचन हनुमान किला के पीठाधीश्वर महंत परशुराम दास सहित कई प्रमुख संत-महंत उपस्थित रहे। ब्रह्मचारी रामानंद जी महाराज ने अयोध्या वासियों और श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस समारोह में पहुंचकर धर्म लाभ उठाएं और प्रसाद ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और सद्भाव की स्थापना के लिए ऐसे आयोजनों में अधिकाधिक भागीदारी आवश्यक है।