७६ वां गणतंत्र दिवस

🍐क्या होता है? गणतंत्र 🍐

गण कहते हैं 👬👬 समूह 👫 को। किसका समूह जो भारत के लोग अंग्रेजों के गुलाम थे वो १५अगस्त सन् १९४७ को आजाद घोषित कर दिये उन्होंने अपना एक समूह बनाया जिसका नाम है 🌲गण🌲उन समूह के लोगों ने २६जनवरी को अपने आजाद लोगों का एक शासन कार्य प्रणाली बनाई उसका नाम है 🌲 तंत्र 🌲 दोनों को मिलाकर बना 🍒 गणतंत्र 🍒 अब स्वतंत्र भारत के लोग प्रतिवर्ष इसका २६जनवरी को उत्सव मनाते हैं।यही है आज का गणतंत्र

🌺सत्यता कुछ और है 🌺

वास्तव में ये एक बहुत बड़ा षड्यंत्र था जिन्ना, महात्मा गांधी , जवाहरलाल नेहरू व अंग्रेजी हुकूमत का। जिसके तहत भारत को आजाद नहीं किया गया अपि उसे बाटा गया।उसके हृदय के टुकड़े किए गए।एक टुकड़ा स्वयं भारत व दूसरा टुकड़ा भी भारत ही था मगर उसका नाम 🌴🌴 पाकिस्तान 🌴🌴रख दिया।इस सब में महात्मा गांधी का जवाहर लाल नेहरू के प्रति मोह,व छद्म राजनीति का चक्रव्यूह था।

इसी बंटे हुए भारत को हमेशा इसी स्थिति में रखने के लिए जो 🌚काला कानून 🌚 २६जनवरी को पास हुआ और लागू किया गया उसी का नाम है तथाकथित 🦄🦄 भारतीय संविधान 🦄🦄

☔☔जागो व जगाओ☔☔

अब समय आ गया है कि भारत अपनी🌺सत्य सनातन वैदिक संस्कृति व सभ्यता 🌺को फिर से लागू कर 🌼 चक्रवर्ती सम्राट 🌼की पदवी को प्राप्त करे।इसके युवा पीढ़ी को महात्मा गांधी [महा +तमा=महा तमा ]जी को उनकी अधर्मी सेना कांग्रेस के साथ भावभीनी विदाई दे और आजाद हिंद फौज के नेता व भारत के 🌻प्रथम राष्ट्रपति नेताजी सुभाष चन्द्र बोस 🌻की सेना, संगठन व पं०रामप्रसाद विस्मिल,भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे 💥 क्रांतिकारियों 💥के इतिहास को नूतन भारत का इतिहास नाम से युवा पीढ़ी की शिक्षा पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाये।

🍅🍅आज की प्रतिज्ञा 🍅🍅 प्रण करते हैं संस्कृति की शाम नहीं होने देंगे।

वीर शहीदों की समाधि बदनाम नहीं होने देगें।।

जब तक रग में गर्म लहू की एक बूंद भी बाकी है।

हम भारत की आजादी को नीलाम नहीं होने देंगे।।

आजादी अभी अधूरी है

यद्यपि आपको मेरा लेख *आजादी अभी अधूरी* है पढ़कर बड़ा अटपटा लग रहा होगा! मगर आप धैर्य रखकर समूचे लेख को पढ़कर *निष्पक्ष चिंतन* करना तब आप भी कहेंगे कि *आजादी अभी अधूरी है* इस लेख की पृष्ठभूमिका में चंद पंक्तियां लिखकर आपकी जिज्ञासा सत्य को जानने के लिए बढ़ाना चाहता हूं।

*इस देश की दीवार में कहां दरार नहीं है?** *सही सलामत एक भी दरो दीवार नहीं है।।*

*ये न पूछो इस चमन को किसने लूटा?*

*बल्कि ये पूछो कि लूट में कौन हिस्सेदार नहीं है।।*

अब मैं आपको प्रमाणों द्वारा सिद्ध करुंगा कि *भारत आज भी गुलाम हैं स्वतंत्रता दिवस केवल बंदर घुड़की है।* हमारी गुलाम के चार कारण हैं।जो भी देश आजाद होता है उस देश में इन चार चीजों का अभाव होता है।

🌻 *गुलामी के ४ कारण*🌻

🏵️१-आर्थिक दासता🏵️

जिस राष्ट्र में अर्थ का अभाव होता है वहां के नागरिक देश से पलायन करते हैं। हमने इस देश में ऐसा होता देखा है और रोज देख रहे हैं। आज जो शहरों में बुल्डोजर चल रहे हैं ये अतिक्रमण कहां से पैदा हुआ।सीधा उत्तर है गांवों में रोजगार न मिलने से सन् १९४७ से ही लोगों ने शहर की ओर पलायन किया आज स्थिति ये है कि भारत के बेरोजगार युवा *गांवों, शहरों को छोड़ स ऊदी अरब, दुबई, कुवैत आदि विदेशी देशों में चार से छः वर्षों के लिए अपने परिवार का प्यार दुलार छोड़कर गुलामी करते हैं और अपना परिवार चलाते हैं!* इतनी सरकारें आई गई और वर्तमान में हैं मगर इसकी ओर नेताओं का ध्यान नहीं जाता है।

भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ *गो-धन* को समाप्त कर दिया बदले में *अपनी जीभ का स्वाद पूरा करने व भारत की अहिंसा वादी संस्कृति को मिटाने के लिए मुर्गा पालन, सूअर पालन, मछली पालन खोल कर सारा देश मांसाहारी होटलों से पाट दिया है।*

आज बैलों की उपेक्षा कर ट्रेक्टर का उपयोग बढ़ा है। *एक ट्रेक्टर प्रतिघंटा काम करने के लिए ५ लीटर डीजल खाता है। यदि वह एक वर्ष में दो हजार घंटे काम करता है तो वार्षिक खर्च ५०,००० आता है।अब ट्रेक्टर को काम देने का अर्थ है इस गरीब कर्जदार देश की १-१/२ लाख की पूंजा नष्ट करना है* ऐसे में यह कहना भारत तीसरी आर्थिक महाशक्ति बन गया है केवल हास्यास्पद है।

🪷 *२४जून १८१३ का षड़यंत्र*🪷

हमारे देश में इतिहास की हत्या १९४७ में ही हो गई इसका एक उदाहरण *२४जून १८१३ को 🍁HOUSE OF COMENS 🍁 में अंग्रेजों की पार्लियामेंट में तीन प्रस्ताव पास हुए।

[१] भारत के स्वदेशी सुख सुविधाओं का नाश करना।

[२] भारत में भुखमरी व गरीबी लाना।

[३] अर्थशास्त्र की नींव कृषि को बरबाद करना।

दुर्भाग्य है कि आज तक भी यह इतिहास हमारे कालेजों व विश्व विद्यालयों में नहीं पढ़ाया जाता और आज भी सरकारें यही कर रहीं हैं। इसीलिए मैं कहता हूं कि *आजादी अभी अधूरी है।।*

🏵️ *२-चारित्रिकह्रास*🏵️

स्वतंत्र देश का अपना *चरित्र व चिंतन* होता है।आज भारत का चारित्रिक ह्रास सबसे अधिक *संसद भवन में होता है जिसे सारा देश देखता है और खून के आंसू पीता है।* नेता लोग सदन में। *काग युद्ध करते हैं मीडिया उसे पूरे विश्व को दिखाता है इसे रोकने के लिए कोई कानून नहीं है। भ्रष्टाचार की नींव है *बालीवुड अभिनेता/अभिनेत्री* इन्होंने भारतीय संस्कृति/सभ्यता को तार-तार कर दिया है सरकारें मौन होकर तमाशा देख रही हैं।जो *बालीवुड में अभिनेता व अभिनेत्री खेल -खेल जो नंगा नाच करके ऐशो आराम की जिंदगी जीते हैं भारत के युवक-युवतियां उसको प्रैक्टिकल में लाकर आत्महत्या तक पहुंच जाती हैं।

चरित्र को बिगाड़ने वाले मुख्य घटक दो हैं जिस पर सरकारें उदासीन हैं।

[१] परिदृश्य यानि चल चित्र।

[२] आहार -विहार।।

हमारे देश में ६०० करोड़ से अधिक रुपया *विदेशी चीजों को मंगाने के लिए बाहर जाता है। इसीलिए हमें दरिद्रता ने घेरा है।इस द्ररिद्रता के सात कारण प्रमुख हैं।

(१) हमारे उद्योगों का शीघ्र नष्ट होना एवं उनका निजीकरण।

(२) कृषि ज्ञान के अभाव में किसानों की संख्या में वृद्धि।

(३) मौसमी रोगों के नियंत्रण में सरकार की विफलता।

(४) नशा, शराब,गांजा का सरकारी लाईसेंस।(५) भिखारियों की संख्या में वृद्धि।

(६) वैश्या व्यापार से चरित्र हीन प्रजा का जन्म। इसीलिए मैं कहता हूं *आजादी अभी अधूरी है*।

🏵️ *३-राष्ट्रीय इतिहास पर प्रहार 🏵️*

जब हमारे देश का १४अगस्त १९४७ की रात में विभाजन हुआ।एक भाग पाकिस्तान तो दूसरा हिंदुस्तान।उस समय के नेताओं ने *दो भारी भूल की जिसका परिणाम हम आज भी भोग रहे हैं और आज के नेता उस भूल को बढ़ावा ही दे रहे हैं।* वो भूल इस प्रकार है।

[१] अपने देश की भाषा *हिंदी को राष्ट्रभाषा नहीं घोषित किया* । जबकि हमसे दो साल बाद आजाद होने वाले चीन ने पहला काम चाइनीज भाषा को पहले राष्ट्रभाषा घोषित किया।

[२] गुरुकुल प्रणाली को बहाल न करके *लार्ड मैकाले शिक्षा* को ही जारी रखना। इसका परिणाम यह हुआ कि हमारे बच्चों को *इतिहास प्रदूषण* में रहकर ही आई ए एस बनना पड़ता है। सबसे घातक शिक्षा सूत्र तीन हैं जिसके कारण हम अभी गुलाम हैं।

(१) हमारे देश का नाम इंडिया है और हम इंडियन हैं।

(२) आर्य लोग विदेशी आक्रांता हैं यहां के मूल पूर्वज अनार्य हैं।

(३) देश के प्रबल शत्रु मनुवादी हैं।

*इस प्रकार अंग्रजों ने भारत में जो शिक्षा की नींव डाली वह 🌸 ईंट गारे की नींव नहीं थी।वह लोहे और सीमेंट की नींव🌸 थी जो अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी वैंसी की वैंसी है।।*

🏵️ *४ सुराज न होना🏵️*

चौथा और सबसे से प्रबल कारण गुलामी का है *सुराज का न होना* हमारे नेता आज भी नहीं समझ पा रहे हैं कि अंग्रेजों ने हमें *स्वराज दिया सुराज नहीं दिया*।

सन् १८७५ में महर्षि दयानंद सरस्वती जी जनमानस को समझाते हुए प्रवचन करते थे कि। *अंग्रेजों की व्यवस्था बड़ी दुरस्त है मगर उसमें सुराज नहीं है*।

🌳 *क्या है सुराज?🌳*

सुराज में बेरोज़गारी🌸भत्ता🌸 वृद्धावस्था पेंशन🌸 आरक्षण 🌸 अल्पसंख्यक आयोग🌸 बैंक ऋण🌸 छात्रवृत्ति🌸कन्या धन🌸 लैपटॉप वितरण व्यवस्था *गोंण एवं हीन व्यवस्था* मानी जाती है। सुराज की मुख्य विचार धारा हर व्यक्ति को *मैं* का बोध कराकर उसके अनुकूल कार्य करने की प्रेरणा है। सुराज में *नेता का चुनाव नहीं चयन* होता है सुराज का साम्यवाद हाथ की पांच अंगुलियों के संगठन की तरह है। *जैसे हाथ की पांचों अंगुलियां छोटी -बड़ी हैं मगर जब मुट्ठी बनती है उसमें अपार शक्ति का स्तोत्र बहने लगता है। सुराज में चारों वर्णों का एक ही लक्ष्य होता सुराज की स्थापना*

🌼 *आरक्षण अभिशाप*🌼

एक स्वतंत्र राष्ट्र को जातिगत आरक्षण में धकेलना मानवता की हत्या हैं। गरीब ब्राह्मणों में भी होते हैं करोड़पति दलितों में भी हैं। व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति से नहीं उसकी योग्यता से होना चाहिए। *आरक्षण राष्ट्र निर्माण में कैंसर है* इससे कभी भी स्वतंत्र राष्ट्र की कल्पना करना दिवास्वप्न है। समान शिक्षा प्रणाली अर्थात् *जिस विद्यालय में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री,आई ए एस अफसर के बच्चे पढ़ें उसी में मजदूर, चपरासी, रिक्शे वाले के बच्चे पढ़ें तो किसी को भी आरक्षण* की जरूरत नहीं होगी।

यदि हमें भारत को *पूरी आजादी दिलवानी है तो उपरोक्त चार विंदुओं पर काम करना शुरू कर देना चाहिए।*

🌻 आजादी की मांग 🌻

यदि सरकारें चाहती है कि भारत *पूर्ण स्वतंत्रता को प्राप्त करे तो निम्न विंदुओं को त्वरित प्रयोग में लाना होगा।

[१] संपूर्ण देश में समान शिक्षा व समान नागरिकता लागू हो।

[२] सहशिक्षा को समाप्त करें।बालक/बालिकाओं के विद्यालय प्राथमिक से कालेज तक अलग-अलग हों।

[३] आरक्षण समाप्त हो योग्यता को प्राथमिकता हो।

[४] नेताओं की योग्यता तय हो। अपराधी को टिकट न मिले चाहे वो नेता ही क्यों न हो

[५] जनसंख्या नियंत्रण कानून शीघ्र बने। और दलगत राजनीति समाप्त हो।

🌹 *राष्ट्र को संदेश*🌹

धर्म के नाम पर प्यारो! तुम्हें मरना नहीं आता।

लहू से कासये तकदीर को भरना नहीं आता।।

छुरी से पेट फड़वाना तुम्हें आता नहीं प्यारो! हकीकत की तरह कुर्बान सर करना नहीं आता।।

तबाही का तुम्हारी एक ही कारण है मित्रों!

तुम्हें कहना तो आता है, मगर करना नहीं आता!!

समस्त देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

आचार्य सुरेश जोशी

🔥 *वैदिक प्रवक्ता*🔥

आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश।