अमृत महोत्सव वर्ष भारत के संविधान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण- मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि भारत की स्वाधीनता के अमृतकाल में हम भारत के संविधान के अमृत महोत्सव वर्ष का शुभारम्भ कर रहे हैं। अमृत महोत्सव वर्ष भारत के संविधान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष है। न्याय, समता तथा बंधुता के मूल भाव को लेकर भारत के संविधान ने 75 वर्षों की यात्रा को शानदार तरीके से तय किया है। इस संविधान का संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है।
मुख्यमंत्री आज यहां लोक भवन में संविधान दिवस पर आयोजित ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संविधान की उद्देशिका का पाठन कराया। मुख्यमंत्री ने संविधान के मूल्यों एवं आदर्शों से सम्बन्धित विषय पर वाद विवाद तथा निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत तथा सम्मानित किया। उन्होंने भारत माता तथा बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्रीने प्रदेशवासियों को संविधान दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माताओं व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के वास्तुकार थे। उन्होंने दुनिया के सबसे विस्तृत संविधान के रूप में भारत के संविधान को भारत के अनुरूप बनाकर आज ही के दिन सन् 1949 में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की आधारशिला को पुख्ता किया था। बाबा साहब की धरोहर यह संविधान 140 करोड़ देशवासियों को एकता के सूत्र में बांधता है। मुख्यमंत्रीने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को संरक्षण तथा सम्मान प्रदान करता है। समानता के भाव के साथ जोड़ता है। संविधान निर्माताओं की मूल भावना का सम्मान करना भी सिखाता है। यदि हम भारत के संविधान द्वारा नागरिकों के लिए तय किए गए मूलभूत कर्तव्यों का पालन करेंगे, तो यह बाबा साहब, संविधान निर्माताओं तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश 15 अगस्त सन् 1947 को स्वतंत्र हुआ। आजादी से पूर्व वर्ष 1946 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की इच्छा के अनुरूप कैबिनेट मिशन के समक्ष रखे गए प्रतिवेदन में एक स्वतंत्र संविधान सभा के गठन की मांग की गई थी। वर्ष 1946 में संविधान सभा के गठन के पश्चात पहली बैठक 09 दिसम्बर, 1946 को सम्पन्न हुई। इसकी अध्यक्षता डॉ0 सच्चिदानन्द सिन्हा ने की थी। वह संविधान सभा के सबसे वरिष्ठतम सदस्य थे। 11 दिसम्बर, 1946 को डॉ0 राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। इसके पश्चात इस दिशा में निरंतर कार्यक्रम आगे बढ़े। संविधान सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान अंगीकार किया। भारत ने 26 जनवरी, 1950 को अपना संविधान लागू किया। मुख्यमंत्री  ने कहा कि संविधान की अनेक समितियों में प्रारूप समिति अत्यन्त महत्वपूर्ण थी। इस समिति को संविधान के प्रारूप पर कार्य करने के लिए गठित किया गया। भारत माता के महान सपूत भारत रत्न बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जी इस समिति के अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया। न्याय, बंधुता तथा समता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संविधान के अलग-अलग सत्रों  के माध्यम से भारत की जनता से जुड़े हुए अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा परिचर्चा की गई। बाबा साहब ने इस डिबेट का निचोड़ भारत के संविधान के रूप में देश को प्रदान किया। संविधान सभा में हुई सार्थक बहस 10 वॉल्यूम में समाहित की गई है। यह बहस आज भी हमारी विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के लिए एक मार्गदर्शिका का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्थान में यह डिबेट होनी चाहिए। आपको इसमें विभिन्न मुद्दे तथा तथ्य प्राप्त होंगे। भारत की यात्रा के बारे में जीवन दर्शन को जानने व सीखने का अवसर प्राप्त होगा।