आज का दिन भारतीय सभ्यता संस्कृति में एक महत्वपूर्ण दिन है- रानी आशिमा सिंह

बस्ती – शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में राजमाता आशिमा सिंह ने विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजा किया। राजमाता ने बताया कि इस दिन भगवान राम और मां दुर्गा की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का और प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया था। इसलिए इसे विजयादशमी कहते हैं, जिसका अर्थ है ‘विजय का दसवां दिन’

देशभर में इस पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाता है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष दशहरा पर श्रवण नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन श्रवण नक्षत्र का होना अति शुभ और लाभकारी होता है। ऐसे में आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को इन संदेशों के माध्यम से दशहरा की शुभमकानएं दिया।

राजा ऐश्वर्य प्रताप सिंह ने विजयदशमी के दिन रावण दहन किया गया है राजा ऐश्वर्य प्रताप सिंह ने कहा कि इस दिन अधर्म पर धर्म की विजय असत्य पर सत्य की विजय बुराई पर अच्छाई की विजय पाप पर पुण्य की विजय अत्याचार पर सदाचार की विजय क्रोध पर दया, क्षमा की विजय और अज्ञान पर ज्ञान की विजय हुआ था। दशहरा लाता है उम्मीद की आस रावण की तरह आपके दुख का नाश होगा ।

इस अवसर पर रानी नंदिता सिंह, पूजा सिंह, इन्द्रसेन सिंह , घनश्याम सिंह, अभिषेक सिंह, अवधेश सिंह, राहुल सिंह, सत्य प्रकाश सिंह आदि उपस्थित रहे।