वैज्ञानिक बकरी पालन से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर, पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

वैज्ञानिक बकरी पालन से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर, पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

 

कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में 25 युवक-युवतियां ले रहे प्रशिक्षण, नस्ल चयन से लेकर स्वास्थ्य एवं चारा प्रबंधन तक दी जाएगी जानकारी

 

लवकुश सिंह संवाददाता

अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती

 

बस्ती । ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में पांच दिवसीय रोजगारपरक बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में सरल परियोजना के अंतर्गत 03 से 07 नवंबर तक आयोजित इस प्रशिक्षण को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कानपुर द्वारा वित्त पोषित किया गया है। प्रशिक्षण में जनपद के 25 युवक-युवतियां प्रतिभाग कर रहे हैं।

 

कार्यक्रम के शुभारंभ पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. पी.के. मिश्र ने वैज्ञानिक बकरी पालन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम है। कम पूंजी, सीमित स्थान और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से इसे सफल व्यवसाय के रूप में अपनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं एवं किसानों से वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर बकरी पालन को व्यावसायिक स्वरूप देने का आह्वान किया।

 

प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में पशुधन प्रसार अधिकारी अबरार अहमद अंसारी ने पशुपालन विभाग की विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान एवं बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बकरियों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए समय से टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने पर जोर दिया।

 

वैज्ञानिक डॉ. वी.बी. सिंह ने उन्नत नस्लों के चयन, आवास व्यवस्था, संतुलित आहार, प्रजनन एवं स्वास्थ्य प्रबंधन की जानकारी दी। वहीं डॉ. प्रेम शंकर ने पशुशाला की स्वच्छता और रोगों की रोकथाम के उपाय बताए। प्रसार वैज्ञानिक आर.बी. सिंह ने नस्ल सुधार एवं उन्नत प्रजनन तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

 

सस्य विज्ञान वैज्ञानिक हरिओम मिश्र ने बकरी पालन के साथ चारा उत्पादन एवं एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने की उपयोगिता बताई। उन्होंने वर्षभर पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी। गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अंजलि वर्मा ने बकरी पालन के माध्यम से महिला उद्यमिता, स्वरोजगार और पारिवारिक आय बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

 

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बकरियों की नस्लों के चयन, आवास, आहार, प्रजनन, स्वास्थ्य एवं रोग प्रबंधन तथा चारा उत्पादन के संबंध में सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। इस पहल से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही बकरी पालन को रोजगार के एक बेहतर विकल्प के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।