प्रधानमंत्री आवास योजना से यूपी में 42 लाख से अधिक परिवारों को मिला पक्का मकान

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में अब तक इस योजना के तहत 42 लाख से अधिक आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जबकि मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत लगभग छह लाख आवास आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक पात्र परिवार को आवास उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार इस सुविधा से वंचित न रहे।उप मुख्यमंत्री मंगलवार को लखनऊ स्थित हयात रीजेंसी में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की क्षेत्रीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया और लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए।केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण को केंद्र में रखकर योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प का महत्वपूर्ण उदाहरण है। पक्का मकान मिलने से परिवारों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षा मिलती है। साथ ही बच्चों की शिक्षा, महिलाओं की गरिमा, परिवार के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए बेहतर वातावरण तैयार होता है। सुरक्षित आवास ग्रामीण परिवारों में भविष्य के प्रति विश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें आजीविका और आर्थिक प्रगति के अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद करता है।उन्होंने कहा कि आवास निर्माण को केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए आवास योजना के साथ पेयजल, स्वच्छता, बिजली, रसोई गैस, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का समन्वय सुनिश्चित किया जाए, ताकि लाभार्थियों को समग्र विकास का लाभ मिल सके।उप मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों से आए अधिकारियों से योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव, सफल प्रयोग और व्यावहारिक चुनौतियां साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और समस्याओं के समाधान खोजने का अवसर मिलता है। योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए अधिकारियों को ठोस सुझाव देने चाहिए।उन्होंने लाभार्थियों के चयन में पात्रता के मानकों का पालन करने, आवास स्वीकृति से लेकर निर्माण पूरा होने तक नियमित निगरानी रखने और पात्र परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और निर्माण कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने के साथ आवास की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि लाभार्थियों को सुरक्षित और टिकाऊ मकान मिल सकें।कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को आवास उपलब्ध कराकर उसके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों से योजना की प्रगति, क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना पर गंभीरता से विचार-विमर्श करने की अपील की।प्रदेश की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं के विकास से परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए विभागीय समन्वय और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।कार्यक्रम के प्रारंभ में ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू ने अतिथियों का स्वागत किया। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक (ग्रामीण आवास) शक्तिकांत सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजना की प्रगति, प्रभावी क्रियान्वयन और गुणवत्ता सुधार से जुड़ी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने नियमित निगरानी, डिजिटल सामाजिक अंकेक्षण और समूह आधारित आवास मॉडल के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला।प्रमुख सचिव सौरभ बाबू ने नवाचार, गुणवत्ता और विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर कार्यपद्धतियों के आदान-प्रदान पर जोर दिया। कार्यशाला में बस्ती, फतेहपुर और लखीमपुर खीरी के जिला स्तरीय अधिकारियों ने योजना के जमीनी क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। प्रश्नोत्तर सत्र में आवास निर्माण, निगरानी, गुणवत्ता सुधार और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान पर चर्चा हुई।ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश पर 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के योजना से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्राम्य विकास आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार पीयूष श्रीवास्तव और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार सहित केंद्र और प्रदेश सरकार के अधिकारी मौजूद रहे।