अयोध्यस्थ श्री रामलीला महोत्सव बाली वध, लंका दहन और माता सीता की खोज के जीवंत मंचन से गूंजी अयोध्या

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या।अयोध्यस्थ श्री रामलीला महोत्सव समिति द्वारा राम की पैड़ी, स्वर्गद्वार, श्री अयोध्याजी में आयोजित भव्य रामलीला के आठवें दिन सीता माता की खोज, हनुमान-सुग्रीव मिलाप, बाली वध और लंका दहन जैसे प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण व जीवंत मंचन किया गया। इस दौरान “जय श्री राम” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रांत प्रचारक कौशल किशोर एवं सीओ आशुतोष तिवारी ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। समिति के पदाधिकारियों एवं महन्तों द्वारा अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया। भावुक कर देने वाले प्रसंगों का मंचन लीला के आठवें दिन दर्शाया गया कि माता सीता के हरण के बाद भगवान श्री राम और लक्ष्मण व्याकुल होकर वनों में उनकी खोज करते हैं। इस दौरान उनकी भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से होती है। भगवान राम सुग्रीव का राज्याभिषेक कर बाली का वध करते हैं। इसके पश्चात, हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका पहुँचते हैं, जहाँ अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट कर उन्हें प्रभु राम की मुद्रिका सौंपते हैं और उनका ढांढस बंधाते हैं। रावण की सभा में जब हनुमान जी की पूँछ में आग लगाई जाती है, तो वे अपनी पूँछ से पूरी लंका को भस्म कर देते हैं (लंका दहन)। इसके बाद वे वापस लौटकर माता सीता की चूड़ामणि और उनका संदेश भगवान राम को समर्पित करते हैं, जिसे देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। समिति के पदाधिकारियों का विशेष योगदान कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री रामलीला महोत्सव समिति कार्यकारिणी मण्डल 2026 के अध्यक्ष महन्त वैदेही वल्लभ शरण महाराज (वामन जी का मन्दिर), महामन्त्री ज.गु.रा. स्वामी श्री अनन्ताचार्य महाराज (उत्तरतोताद्रिमठ), संयोजक म० अवधेश कुमार दास (बड़ा भक्त माल) और सह अध्यक्ष विकास श्रीवास्तव (बाघी मन्दिर) का विशेष योगदान रहा। इसके साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष महन्त राजीवलोचन शरण (बधाई भवन), उपाध्यक्ष म० हरिमोहन शरण, आलोक कुमार मिश्रा, धीरेंद्र प्रताप सिंह, महेंद्र शुक्ला तथा कोषाध्यक्ष डॉ. प्रभाकर शरण की उपस्थिति सराहनीय रही। व्यवस्था एवं संचालन में मन्त्री विजय पाण्डेय, लक्ष्मीकान्त शुक्ला, झिनकान पाण्डेय, पंकज लोचन, डॉ० संतोष पाण्डेय, आशुतोष त्रिपाठी, रामजी शरण सेवड़ा मन्दिर, लीला संचालक म० रवि शंकर शरण ‘व्यास’, रमैया बाबा, प्रकाश मिश्र, हनुमत हरिराम सदन तथा प्रचार मन्त्री म० विनोद शरण जी, शिवकुमार मिश्र व ध्रुव पाण्डेय ने सक्रिय भूमिका निभाई।