नामधारी सिखों ने सद्भावना और उत्साह के साथ मनाया श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व और विहिप का स्थापना दिवस

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय अयोध्या/
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के मंदिरों में हिंदू भाइयों के साथ बांटी खुशियां
विभिन्न राज्यों में भव्य आयोजन
सतिगुरू दलीप सिंघ जी के विशेष आदेशानुसार नामधारी सिखों ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर हिंदू भाइयों के साथ मिलकर भगवान श्री कृष्ण का प्रकाश पर्व (श्री कृष्ण जन्माष्टमी) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का स्थापना दिवस अत्यंत श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया। इस दौरान विभिन्न मंदिरों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में नामधारी सिखों ने पूरी तन्मयता से सहभागिता की। गुरुवाणी के आधार पर भगवान कृष्ण के प्रति अटूट आस्था नामधारी समाज के अनुसार, गुरुवाणी में भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए उल्लेख मिलता है । “दुआपुरि सतिगुर हरी क्रिसन हाहा हरि हरि नामु जपावै।”तथा “दुआपुरि क्रिसन मुरारि कंसु किरतारथु कीओ॥ कलिजुगि प्रमाणु नानक गुरु अंगदु अमरु कहाइओ॥ गुरुवाणी में भगवान कृष्ण चंद्र जी को द्वापर युग का अवतार और सतिगुरू नानक देव जी को कलियुग का अवतार बताया गया है। इसी वैचारिक और आध्यात्मिक एकता के कारण नामधारी सिख भगवान श्री कृष्ण को अपना पूज्य मानते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष नामधारी सिख मथुरा जाकर अपने हिंदू भाइयों के साथ मिलकर यह पावन पर्व मनाते हैं। आपसी प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश सतिगुरू दलीप सिंघ जी का स्पष्ट संदेश है कि समाज के सभी धर्मों और संप्रदायों के बीच आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे की भावना को निरंतर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की साझा विरासत और सामाजिक एकता का एक अनूठा प्रतीक बनकर उभरा।