भदोही के किसान हीरा लाल यादव ने नवाचारी खेती से सरसों उत्पादन में बनाया नया कीर्तिमान

लखनऊ,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ की अवधारणा के साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर प्रदेश के किसानों की खेती में दिखाई देने लगा है। कृषि विभाग की किसान हितैषी योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर भदोही जनपद के ग्राम पिपरी निवासी प्रगतिशील किसान हीरा लाल यादव ने सरसों उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती करते हुए सरसों की उत्पादकता 36.28 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाई और राज्य स्तरीय फसल प्रतियोगिता में सरसों उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और शाल प्रदान कर सम्मानित किया गया।सरसों रबी मौसम की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है और प्रदेश में इसके क्षेत्रफल तथा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। तिलहन फसलों के लिए बीज से लेकर सिंचाई और बाजार तक किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से तोरिया, सरसों, तिल और अलसी जैसी तिलहनी फसलों के उन्नत और प्रमाणित बीज निःशुल्क मिनी किट के रूप में किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही गन्ना किसानों को गन्ने की कतारों के बीच खाली स्थान में सरसों और राई जैसी तिलहनी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसान अतिरिक्त भूमि लिए बिना अपनी आमदनी बढ़ा सकें।हीरा लाल यादव स्नातक शिक्षित हैं और पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों के निरंतर संपर्क और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने खेती के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाना शुरू किया। उन्हें विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण और संसाधनों का लाभ मिला। सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन, हरित क्रांति योजना के तहत धान एवं गेहूं प्रदर्शन, परंपरागत कृषि विकास योजना तथा उद्यान विभाग के माध्यम से ड्रिप सिंचाई जैसी योजनाओं से जुड़कर उन्होंने वैज्ञानिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। इन योजनाओं ने उन्हें आधुनिक कृषि संसाधनों और नई तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।हीरा लाल यादव ने बताया कि कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों और कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिकों से उन्हें समय-समय पर कृषि संबंधी मार्गदर्शन मिलता रहा। रहमानखेड़ा, लखनऊ तथा जनपद के बाहर आयोजित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने से उनके खेती के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया। उन्होंने जैविक खेती की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग शुरू किया। इसके साथ ही धान, गेहूं और सरसों की खेती में कतारबद्ध बुवाई की वैज्ञानिक पद्धति अपनाई।कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पहले वैज्ञानिक तरीके से सरसों की बुवाई नहीं होने के कारण सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 22 से 24 कुंतल तक उत्पादन प्राप्त होता था। हीरा लाल यादव ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2024-25 में सरसों की ‘धाकड़’ प्रजाति की समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से बुवाई की। उन्होंने फसल की सिंचाई, निराई-गुड़ाई तथा उर्वरक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि उनकी सरसों की उत्पादकता बढ़कर 36.28 कुंतल प्रति हेक्टेयर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।हीरा लाल यादव की इस उपलब्धि ने उन्हें प्रदेश स्तर पर पहचान दिलाई। राज्य स्तरीय फसल प्रतियोगिता में सरसों उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और शाल देकर सम्मानित किया। यह उपलब्धि किसान की मेहनत, वैज्ञानिक खेती के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग का उदाहरण बनी है।हीरा लाल यादव की सफलता से यह संदेश भी सामने आया है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक कृषि पद्धति, जैविक खाद, बेहतर फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का सही ढंग से उपयोग करके खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के साथ उन्नत बीज, सिंचाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य तकनीक, प्रशिक्षण, अनुदान और प्रोत्साहन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाकर उन्हें समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। हीरा लाल यादव की उपलब्धि इसी दिशा में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आई है।