एम.आर.ए. मेडिकल कॉलेज में यू.जी.सी. मेंटल हेल्थ एवं वेल-बीइंग कार्यक्रम आयोजित

एम.आर.ए. मेडिकल कॉलेज में यू.जी.सी. मेंटल हेल्थ एवं वेल-बीइंग कार्यक्रम आयोजित

 

अम्बेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, अम्बेडकरनगर में यू.जी.सी. (Mental Health & Well-Being Programme) के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, डिप्रेशन, आत्महत्या की रोकथाम तथा सकारात्मक विचारों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

कार्यक्रम में डॉ. अमित कुमार गुप्ता, मानसिक रोग विभागाध्यक्ष, द्वारा डिप्रेशन के लक्षण, डिसोसिएटिव डिसऑर्डर, साइको सोमैटिक डिसऑर्डर,धात सिंड्रोम, नकारात्मक विचारों तथा मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से आत्महत्या की रोकथाम में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

कार्यक्रम के दौरान डिप्रेशन की पहचान, उसके प्रमुख लक्षणों तथा समय रहते उचित सहायता एवं उपचार प्राप्त करने के विषय में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने तथा मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज न करने के लिए प्रेरित किया गया।

 

इस अवसर पर रा०बा०हा० रामपुर सकरवारी विद्यालय अंबेडकर नगर से दीक्षा चौधरी (सहायक अध्यापक) एवं कॉलेज ऑफ नर्सिंग के बी.एससी. नर्सिंग प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नर्सिंग स्टाफ की सक्रिय सहभागिता रही। नर्सिंग स्टाफ में सोनी पाण्डेय, सुमन वर्मा प्रथम, सुमन वर्मा द्वितीय, योगिता दूबे एवं नीलम यादव सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।

 

कार्यक्रम में ए०टी०एफ० स्टाफ से विनोद कनौजिया काउंसलर, डॉ प्रियम खरे काउंसलर, अनुराग त्रिपाठी स्टाफ नर्स, स्वीटी शर्मा डेटा मैनेजर सहित अन्य डेल्टा कर्मचारी निशा, राघव राम पांडेय एवं संबंधित स्टाफ उपस्थित रहे। LT-1 में आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने में हिमांचल एवं राजित राम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में टीचर्स एसोसिएशन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, डिप्रेशन एवं अन्य मानसिक समस्याओं की समय पर पहचान करना तथा आत्महत्या की रोकथाम के लिए सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण को बढ़ावा देना रहा।