बोल बम के नारों से गुंजायमान हुआ वातावरण
प्रयागराज से वाराणसी तक एक लेन कांवड़ियों के लिए रिजर्व, हाईवे पर आरएएफ अलर्ट
गंगाजल भरने के बाद किया प्रायश्चित, अनजाने में हुई गलतियों की माफी मांगी
प्रयागराज। सावन में शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए आतुर कांवड़ियों का हुजूम उमड़ पड़ा है। दशाश्वमेध घाट और संगम से जल भरकर कांवड़िये विभिन्न शिवालयों सहित बाबा विश्वनाथ को जल चढ़ाने निकल पड़े हैं।
सावन के पहले सोमवार पर कांवड़ यात्रा को लेकर खास इंतजाम हुए हैं। प्रयागराज में मंदिरों, शिवालयों में भीड़ उमड़ रही है। प्रयागराज से वाराणसी तक कांवड़ियों के लिए सड़क की एक लेन रिजर्व कर दी गई। ट्रैफिक प्लान, रूट डायवर्जन के साथ ही ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पुलिस और आरएएफ की टीमें हाईवे पर सुरक्षा में लगी हैं। पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने ब्रीफिंग के बाद सभी अफसरों को निर्देश दिए हैं।
सावन माह की कांवड़ यात्रा के लिए अब 29 अगस्त तक विशेष ट्रैफिक व्यवस्था और रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया। प्रयागराज-वाराणसी हाईवे पर एक लेन पूरी तरह कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी और दूसरी लेन से सामान्य वाहन चलेंगे। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर शास्त्री पुल (झूसी पुल) पर भारी वाहनों और रोडवेज बसों की एंट्री रोक दी गई। बड़े वाहनों को बाईपास से निकाला जाएगा।
दशाश्वमेध घाट पर कई कांवड़िए गंगाजल भरने के बाद उठक-बैठक लगाते दिखाई दिए। कुछ श्रद्धालु अपने तीर्थ पुरोहितों के सामने भी यह धार्मिक क्रिया कर रहे थे। इसे देखकर वहां मौजूद लोगों में यह जानने की उत्सुकता रही कि आखिर कांवड़िए ऐसा क्यों करते हैं।
तीर्थ पुरोहितों के अनुसार यह किसी दंड या अनिवार्य नियम का हिस्सा नहीं, बल्कि आस्था, प्रायश्चित और समर्पण से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले और गंगाजल भरने के बाद श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ से अपने जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। उठक-बैठक लगाकर वे अपने पश्चाताप और शिव के प्रति समर्पण का भाव प्रकट करते हैं।