कश्मीरी पंडितों सहित बाहरी हिन्दुओं को भी कश्मीर में बसाना चाहिए: पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

प्रयागराज। शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी उड़ीसा स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों सहित बाहरी हिंदुओं को बसाना चाहिए। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। शंकराचार्य ने महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर 19 संगम लोअर मार्ग स्थित अपने शिविर में हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित एवं राष्ट्र धर्म व आध्यात्म से संबंधित उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर के क्रम में उक्त वक्तव्य दिया।
शंकराचार्य ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को वहां से विस्थापित होने के लिए बाध्य किया गया। समाधान के रूप में कश्मीर में 50–60 किलोमीटर का जिला बनाया जाए जहां विस्थापित कश्मीरी पंडितों को सुविधा सुरक्षा स्नेह पूर्वक के बसाया जाय। फौज से सेवानिवृत्त हुए देशभक्त फौजियों को भी कश्मीर में बसाने पर विचार करना चाहिए ये कश्मीर समस्या के समाधान के लिए आवश्यक है। मानवता के पक्षधर मुस्लिमों को आवाज उठानी चाहिए कि विभाजन के बाद स्वतंत्र भारत में मुस्लिम सम्मानित सुरक्षित हैं जितना अरब देश, पाकिस्तान और बांग्लादेश में नहीं और इसे हिंदुओं की उदारता समझना चाहिए न कि दुर्बलता। ऐसा पूरे विश्व में प्रचारित होना चाहिए जो मानवता के पक्षधर मुस्लिम हैं।
 रामसेतु से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राम सेतु को तोड़ने का प्रयास किया अत्याधुनिक मशीनों द्वारा किंतु रामसेतु से टकराकर वे मशीनें खुद नष्ट हो गईं और रामसेतु की रक्षा हुई। सनातन सिद्धांत हर देश काल परिस्थिति में सिद्ध और विजयी है।
हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी के दौरान अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया ने पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का दर्शन कर उनसे आशीर्वाद लिया।
 इस दौरान शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी श्री निर्विकल्पानंद सरस्वती, आचार्य विवेक मिश्र वृंदावन, प्रफुल्ल चैतन्य ब्रम्हचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, राजेश चैतन्य ब्रम्हचारी सहित बड़ी संख्या में शिष्यगण व श्रद्धालु उपस्थित रहे।