अवध वाटिका साहित्य संस्थान द्वारा संविधान दिवस पर एक शाम किशोर श्रीवास्तव के नाम काव्य गोष्ठी व सम्मान समारोह आयोजित किया

बहराइच । संविधान दिवस के पावन अवसर पर अवध वाटिका साहित्य संस्थान (पंजीकृत )बहराइच के तत्वावधान में आयोजित प्रथम नियमित पाक्षिक कवि गोष्ठी का आयोजन सेनानी भवन सभागार में किया गया । दिल्ली से पधारे अंतरराष्ट्रीय कवि,लघु फिल्म निर्माता श्री किशोर श्रीवास्तव के बहराइच भ्रमण के अंतर्गत *एक* *शाम किशोर श्रीवास्तव के नाम* आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राम सागर राव (पूर्व विधायक)ने की, मुख्य अतिथि के रूप में श्री किशोर श्रीवास्तव दिल्ली ,विशिष्ट अतिथि के रूप में मोहम्मद याकूब अज़्म गोण्डवी , शैलेन्द़ शुक्ल कवि को संस्थान के संरक्षक राम सागर राव व डा0 अशोक गुलशन व अध्यक्ष पी0के0प्रचण्ड उपाध्यक्ष रईस सिद्दीकी द्वारा चार कवियों श्री किशोर श्रीवास्तव, शैलेन्द़ शुक्ल, रवि गुलशन, व याकूब अज्म गोण्डवी को अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन तिलक राम अजनबी ने किया व स्वयं के द्वारा माँ वीणा पाणि की वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ फिर नवोदित रचनाकार महीपचन्द़ कन्नौजिया ने पढ़ा –मैं तुम्हारा ही था मैं तुम्हारा ही हूँ, हर जन्म मैं तुम्हारा रहूंगा सदा। बम्पर बहराइची ने पढ़ा –घर में हुड़दंग मचा दिए साले, सबको उल्लू बना दिए साले। किशोरी लाल चौथरी ने पढ़ा –अखिल विश्व में जिस भारत ने नारी का सम्मान किया है, नारी को माँ बहना कहकर देवी जैसा मान दिया है। रईस सिद्दीकी ने पढ़ा —बढ़के आगोश में लेगी खुल्द ए-बरी। माँ के कदमों का बोसा लिया कीजिये। रंवि गुलशन ने पढ़ा –कौन बंधाये धीरज अब माँ, कौन प्यार से समझाये। तिलक राम अजनबी ने पढ़ा –प्यार वो है नहीं कि बिखर जाये हम। प्यार वो है कि खुद में संवर जाये हम। शैलेन्द़ शुक्ल ने पढ़ा –न शौक है न दर्दे दिल आशनाई है। सच रक्म करने को हमने कलम उठाई है। अज्म गोण्डवी ने पढ़ा –आप को भी याद करना छोड़ देंगे आज से, शर्त यह है आप भी यादों में आना छोड़ दें। हास्य कवि पी0के0प्रचण्ड ने पढ़ा बस हमसे पढ़ैम भवा गलती लव लेटर वहिकै रोज मिलै,, उ ईलू ईलू लिखा किहिस, हम उल्लू उल्लू पढ़ा किन। डा0अशोक गुलशन ने पढ़ा –तुम्हें जब भी जरुरत हो बिना पूंछे चले आना, हमारे गांव के घर में कभी ताले नहीं लगते।