महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या धाम। अयोध्या धाम स्थित सरयू कुंज के पूज्य संत जानकी शरण महाराज ने नवरात्र के पावन अवसर पर इसके धार्मिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवरात्र केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मां भगवती की उपासना के माध्यम से आत्म-शुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का एक अति पवित्र अवसर है।
महंत जानकी शरण महाराज ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा-अर्चना की जाती है। इन दिनों साधक व्रत, जप, तप और ध्यान के माध्यम से अपने अंतःकरण को शुद्ध करते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व शक्ति और भक्ति का संगम: नवरात्र में मां भगवती की साधना करने से साधक को भय और कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संयम और अनुशासन: व्रत और नियमों का पालन करने से शरीर और मन दोनों का शोधन होता है, जिससे साधक में संयम और आत्म-नियंत्रण की भावना जागृत होती है। नारी शक्ति का सम्मान: नवरात्र का पर्व हमें समाज में नारी शक्ति के प्रति सम्मान और श्रद्धा भाव रखने की प्रेरणा देता है। सरयू कुंज के संत ने अयोध्या धाम पधारे सभी श्रद्धालुओं और देशवासियों को नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और सभी से भक्तिभाव के साथ मां आदिशक्ति की आराधना करने का आह्वान किया।