अनुराग लक्ष्य, 9 सितंबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
मैंने आज से तीन वर्ष पहले धारावी के एक मुशायरे में अपनी नेज़ामत के दौरान शाइरा पूनम विश्वकर्मा के सम्मान में यह कहा था कि,
शब ए पूनम की तरह काश यह महफ़िल होती,
ज़िंदगी और भी खुशरंग हो जाती सबकी ।
ज़र्रा ज़र्रा भी महक उठता सारे आलम का,
शायरी और भी खुशरंग हो जाती सबकी ।।
लगता है कि अब वोह वक्त आ गया है, क्योंकि पूनम विश्वकर्मा जिस तरह एक के बाद एक अपने एल्बम को मंज़र ए आम कर रही हैं। यह उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है।
एक और एल्बम के ज़रिए वोह फिर रूबरू हो रही हैं, जिसका उन्वान है , मेरी रातों में रोशनी लेकर ।
आपको बताते चलें कि इस नायाब एल्बम को प्रसिद्ध भजन और ग़ज़ल गायक अनूप जलोटा ने कंपोज किया है, आवाज़ खुद पूनम विश्वकर्मा की है और संगीत से संवारा है अभिषेक पांडे ने ।
पूनम विश्वकर्मा ने अपनी इस ग़ज़ल को बड़े ही दिलकश आवाज़ में गाया भी है।
मेरी रातों में रोशनी लेकर
आप आए हैं चाँदनी लेकर ।
आपने कर दिया उसे पूरा,
जी रही थी जो मैं कमी लेकर ।
रात की थपकियाँ क़ुबूल करें
सुबह आएगी ताज़गी लेकर ।
फूल ग़ज़लों के खिलते हैं मुझमें,
मेरे अश्कों से ही नमी लेकर ।
पेशकश,,,,,, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी