नेपाली साहित्यकार : प्रेम थुलुड
नेपाली साहित्य में प्रेम थुलुड ऐसे संदर्भ है जिन्होंने अपनी कृतियों से नेपाली साहित्य को समृद्ध किया है कविता , कहानी उपन्यास के अलावा उन्होंने साहित्य कि सभी विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई है उनकी कृति नेपाली साहित्य की अमूल्य निधि है वह केवल अपने कृति से ही नहीं बल्कि नेपाली साहित्य को संरक्षित करने के लिए जो कार्य किया है वह बेहद महत्वपूर्ण है दिया अमंग सिंह तमांग पर साहित्य अकादमी ने जो मोनोग्राफ प्रेम थुलुग जी से लिखवा कर जो संरक्षित किया वह सचमुच अमंग सिंह तमांग को सच्ची श्रद्धांजलि है उनका रचना संसार एक विधा पर केंद्रित नहीं है उन्होंने साहित्य की हर विधा को आत्मसात किया है
उनके कार्य ही उनके प्रमाण है कविता के क्षेत्र में उनके कविता संग्रह अर्थहीन यात्रा , आधारहीन सत्य , खंडहर: अधुरो गीत ,
मभित्रको स्वतंत्र कविता की श्रृंखला से प्रमाणित उन्होंने कविता अपने साहित्य रचना संसार में महत्वपूर्ण स्थान दिया है वह नेपाली कविता के सभी मापदंडों रुप संदर्भों को आत्मसात कविता लिखते हैं प्रकृति, कल्पना , प्रेम , सौंदर्य आदि बहुत से रुप विषय उनके कविता के आधार रहे हैं सेतो परेवा ,विवशता:शब्द भित्र, हलचल तो शहरमा खंडहर:अधुरो गीत, जैसी कविताओं से उन्होंने नेपाली साहित्य को समृद्ध किया है अपने निरंतर लेखन प्रक्रिया से उन्होंने जन और राष्ट्र को हमेशा उपदेश देते हुए साहित्य की उपादेयता को बनाए रखा है वह काव्य शास्त्रीय सिद्धांतों को काव्य की आत्मा के निमार्ण मे प्रमुख मानते हैं वह साहित्य की हर विधा का बड़ा ही गहन अध्ययन किया है उनकी पुस्तक ‘साहित्य शास्त्र अवलोकन ‘को पढ़ने से पता चलता है कि उनकी इस पुस्तक में अलंकार , छंद , प्रतीकवाद , आदर्शवाद, नाटक साहित्य , उपन्यास साहित्य , निबंध साहित्य आदर्शवाद , कथा साहित्य , रस साहित्य पर जो सामग्री पाठकों समीक्षा के रुप में पाठकों के लिए लिखी है वह साहित्य का अवलोकन नहीं बल्कि एक पुख्ता ग्रंथ है साहित्य के विभिन्न संदर्भों को समझने का उपक्रम भी है इतना ही नहीं उन्होंने अपनी पुस्तक ‘पाश्चात्य समालोचना साहित्य : काव्यगत अवधारणाहरु’ में विदेशी कवियों वर्ड्सवर्थ , टेलर कालरिज,वाल्टर पेटर, मैथ्यू अनार्ड टी एस इलियट जैसे विद्वानों के काव्य रूप और उनके सिद्धांतों का समीक्षात्मक रुप नेपाली भाषा मे प्रस्तुत कर नेपाली बुद्धिजीवी लोगों को उससे परिचित कराने का प्रयास किया है वह बेहद उल्लेखनीय और महत्वपूर्ण है
वह लेखकीय साहित्य साधना के मूर्ति साधक है जिन्हें किसी पुरस्कार कि लालसा नहीं ना ही किसी लक्ष्य को बनाकर साहित्य रचना की उनकी अभिलाषा है वह एक सच्चे साहित्य साधक है
वह हर समय साहित्य में लीन रहने वाले साहित्य अध्येता है उन्होंने जो लिखा है उसे अनुभव भी किया है समीक्षा से लेकर कविता , उपन्यास,गीत , कहानी जो लिखा है उसमे उनकी स्वयं की द्रष्टि है और वह द्रष्टि उन्होंने सभी लोगों के गहन अध्ययन के बाद स्वयं निर्मित किया है जो उनकी स्वयं की दृष्टि बन कर नेपाली साहित्य को गौरवान्वित कर रही है वह अपनी पुस्तक ‘कवितामय समग्रताको अभ्यास ‘ में नेपाली कविता के युग के साथ कविता आंदोलन का संदर्भ प्रस्तुत कर उसके इतिहास को रेखांकित करने का प्रयास किया है जो एक अलग महत्व रखता है
पृष्ठभूमि :प्रेम थुलुडका
कविताहरू(कविता यात्रा -संस्मरण) में उन्होंने अपनी कुछ कविताओं के अंशों का प्रस्तुत कर उसकी व्याख्या जन के सामने प्रस्तुत कर उसके रूप संदर्भ और महत्व को बताने का प्रयास किया है उनकी साहित्य साधना सचमुच नेपाली साहित्य की अमूल्य निधि है
शिवकुमार राई स्मृति सम्मान, भानु पुरस्कार ,डा शोभा थेगिस सम्मान, राधिका कुलुड राई सम्मान जैसे सम्मानों से प्रमाणित है की नेपाली भाषा और साहित्य मे जो कार्य उन्होंने किए हैं ये सभी पुरस्कार सम्मान उसकी प्रमाणिकता सिद्ध करते हैं इतना ही नहीं सिक्किम और नेपाली साहित्य के प्रख्यात लेखक ‘अंगम सिंह तमांग ‘ को भारतीय साहित्य में एतिहासिक रूप में प्रमाणित और संरक्षित करने का श्रेय प्रेम थुलुंड जी को ही जाता है
वह साहित्य को संरक्षित और संपादित करने में उनकी विशेष रुचि है सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री कवि पवन चामलिंग जी के तीन काव्य संग्रह और गीतों का समीक्षात्मक रूप पर अपनी लेखनी से एक बड़ा कैनवास रचा है जो एक महत्वपूर्ण कार्य भी है
आज 86 वर्ष की अवस्था में सुबह के दैनिक कार्यों से निवृत्त उपरांत वह साहित्य लेखन में संलग्न हो जाते जिससे यह पता चलता है उनका साहित्य के प्रति कितना समर्पण है
हाल ही में सिक्किम की एक महत्वपूर्ण साहित्य संस्थान ‘ कला साहित्य संस्थान , सिक्किम खरलोंग , बिकमत नामची ने ‘ वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम थुलुड अभिनंदन ग्रंथ का संपादन करके जो एक महत्वपूर्ण किया है वह सचमुच नेपाली साहित्य इतिहास को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण कार्य है
प्रेम थुलुड जी की दुनिया इस सांसारिक दुनिया से एक अलग दुनिया है जहां उन्हें सुकून मिलता है और वह उनकी दुनिया साहित्य की दुनिया है उन्होंने अपने जीवन के छः दशक इस साहित्य संसार को दिया है जो भारतीय साहित्य के साथ विशेषकर नेपाली साहित्य के लिए गौरव कि बात है उनके साहित्यिक अवदान को भुलाया नहीं जा सकता है
प्रेम थुलुड भारतीय साहित्य के साथ नेपाली साहित्य के वर्तमान समय के ऐसे हस्ताक्षर हैं जिन्हें हमें सहेजने और संजोने की जरूरत है उनके साहित्यिक ज्ञान को संरक्षित कर उसे जन के बीच प्रचारित और प्रसारित करने की आवश्यकता है केंद्र , राज्य सरकार और बुद्धिजीवी भारतीय और नेपाली साहित्य समाज को उन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है वह नेपाली साहित्य की अमूल्य निधि है ऐसे साहित्य अध्येता को शत शत नमन
प्रो. मुकेश कुमार मिश्र
अंतरराष्ट्रीय हिंदी प्रचारक
बस्ती , यू पी , भारत
7007762298