उन्मुक्त उड़ान परिवार में हर्षोंल्लास से मनाए गए श्री कृष्ण जन्मोत्सव व शिक्षक दिवस 

उन्मुक्त उड़ान परिवार में हर्षोंल्लास से मनाए गए श्री कृष्ण जन्मोत्सव व शिक्षक दिवस

 

उन्मुक्त उड़ान मंच आपका अपना साहित्यिक मंच के सौजन्य से दिनांक 31 अगस्त से 5 सितम्बर 2026 के आगामी साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में दिनांक 31 अगस्त से 1 सितम्बर तक विशेष दिवस एवं त्यौहारों का साहित्यिक महत्ता विषय पर छंदमुक्त कविता रचना के साथ वीडियो प्रस्तुति का आह्वान किया गया था। मंच के सम्मानित रचनाकारों ने उक्त आयोजन में अपनी उपस्थिति देते हुए 20 रचनाएँ प्रस्तुत की। जिसमें 7रचनाकारों ने वीडियो प्रस्तुति प्रेषित किया तथा 157 टिप्पणियों से रचनाकारों का उत्साह वर्धन किया।

 

दिनांक 2 से 3 सितम्बर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के उपलक्ष्य में दो विषयों में से एक पर अपनी रचनाएं छंदमुक्त कविता के रूप में प्रेषित करनी थी। 1. मेरे कृष्ण.. मेरी दृष्टि में 2. कृष्ण.. प्रेम भी, गीता भी।

इन दोनों विषयों पर 39 रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से पटल को सुसज्जित किया और 369 सकारात्मक टिप्पणियों से रचनाकारों का उत्साह बढ़ाया।

दिनांक 4 सितम्बर को शाम 6 बजे से एक आभासी भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें 17 रचनाकारों ने अपने मन पसंद भजन सुनाकर पटल को कृष्णमय बनाकर भक्ति रस में निमज्जित कर दिया।

विशेष शर्मा सुहासिनी ने निम्न पंक्तियों से कान्हा को गुहार लगाई।

हे कान्हा! इतना वर देना,जब जीवन की यमुना उफने,

तुम बन जाना पतवार,हर अँधेरी रात के बाद,दिखाना अपना प्रकाश अपार।

मीनाक्षी चावला मीनू ने मन भावन भजन प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया

हे रे कन्हैया किसको कहेगा तू मैया

एक ने तुझको जन्म दिया रे एक ने तुझको पाला कन्हैया किसको कहेगा तू मैया।

अनु भाटिया हंसिनी ने बहुत सुंदर भजन गा कर सबका मन मोह लिया।

मन में बस गई है,नटखट साँवरे की मूरत,

चितचोर है कान्हा मेरा,सोनी लागे उसकी सूरतं

किरण भाटिया नलिनी ने भी भजन गा कर कृष्ण जन्मोत्सव की ख़ुशी का इज़हार किया।

मथुरा में आज जन्मे कान्हा घर घर खुशी समाई है ,

मेरे घर भी आओ कान्हा भोग पंजीरी बनाई है ।।

उन्मुक्त उड़ान मंच पर मिलकर सबने आज जन्माष्टमी मनाई।

सुमन किमोठी वसुधा ने हारमोनियम के साथ माहिया छंद में बहुत ही सुंदर प्रस्तुति दी

आओ मोहन प्यारे, नैन बिछाए हैं~

अभिनंदन में सारे।

हे! गिरधर गोपाला,जयति जयति कृष्णा~

मनमोहन रखवाला।।

डॉ फूलचंद्र विश्वकर्मा भास्कर ने बहुत ही सुंदर भजन गा कर आयोजन को भव्य बना दिया

नाचे नंदलाल नचावें हरि की मैया।

डॉ.अनीता राजपाल अनु वसुन्धरा ने प्रदत विषय

मेरे कृष्ण मेरी दृष्टि में पर अत्यंत भाव पूर्ण प्रस्तुति दी।

मोह के बन्धनों की जकड़न से बचा अमर-ज्ञान की जोत जगाते मेरे कृष्ण। प्रेम, नीति और गीता सार का समावेशित रूप दिखाते मेरे कृष्ण।

रेखा पुरोहित तरंगिणी ने मैथिली ठाकुर द्वार गया हुए गीत को अपना मधु स्वर देकर समा ही बांध दिया। ओ मोहना प्यारे! ओ मोहना! वृंदावन में मिलेंगे ओ मोहना!

तुम चंदन बनो हम पानी बने, माथे पर मिलेंगे, ओ मोहना!

सविता मेहरोत्रा सुगंधा ने निम्न भजन शास्त्रीय शैली में गा कर आयोजन को नव रूप दिया ।

कृष्णा कहे से तृष्णा मिटे रे राधा करके से बांधा कटे

अशोक दोशी दिवाकर ने मीरा द्वारा गाया गया बहुत ही सुंदर भजन अपनी चिरपरिचित आवाज़ में गा कर आयोजन को सार्थकता प्रदान की।

ना में जानू आरती वंदन,ना पूजा की रीत,

मैं अनजानी दरस दीवानी,मेरी पागल प्रीत।

लिए रे मैंने दो नैनों के,दीपक लिए संजोय,

आए री में तो प्रेम दीवानी,मेरा दर्द ना जाने कोये।

सुरेशचन्द्र जोशी सहयोगी ने दोहे प्रस्तुत कर आयोजन में विभिन्नता एहसास करवाया।

गीता में श्रीकृष्ण ने, दिया पार्थ को ज्ञान।

श्रवण करें इसका सभी, नित्य लगाकर ध्यान।।१।।

मैं ही लड़ता युद्ध में, मेरे लगता घाव।

मेरे ही बहता लहू, मैं ही करूँ बचाव।।२।।

रंजना बिनानी काव्या स्वरागिनी ने मदमस्त होकर कृष्ण के बहुत सुंदर भजन गा भक्ति भाव आविर्भाव कर दिया।

गोकुल में छाई खुशियाली,देखो जन्माष्टमी आई..।

भाद्रपद अष्टमी है आई ,जन्मे है देखो कृष्ण कन्हाई।

परिवार की सक्रिय सदस्या निशा कौल शर्मा चंद्रिका ने बहुत सुंदर भजन गा कर अपने भाव प्रस्तुत किए

मेरा कोई न सहारा बिन तेरे घनश्याम सांवरिया मेरे।

संजीव भटनागर सजग व डॉ कृष्ण कांत मिश्र कमल जी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

आयोजन का समापन करते हुए संयोजिका व संचालिका डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने श्री कृष्ण को अपनी जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करता हुए उनकी माँ द्वारा रचित भजन सुनकर सभी को भाव विभोर कर दिया।

गोविंद चले आओ गोपाल चले आओ।

मुरली धर मोहन इक बार चले आओ।

बलि जाऊँ इन नैनन पर बलिहारी छटा पर होती रहुँ,

कभी भूलूँ न याद तिहारी प्रभु चाहे जागृत सपने में सोती रहुँ।

हरे कृष्ण ही कृष्ण पुकारा करुँ मुख आसुओं से नित धोती रहुँ।

दिनांक 4 से 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक दीप से जलते हज़ारों दीप विषय पर छंदमुक्त कविता में रचनाओं के प्रेषण का आह्वान किया गया था, जिसमें प्रेषित रचनाओं की संख्या 36 तथा सकारात्मक टिप्पणियों की संख्या 260 तक पहुँची। 5 सितम्बर को सायं 6 बजे से एक आभासी काव्य गोष्ठी में अपने शिक्षक जीवन के अविस्मरणीय पल विषय पर 20 काव्य पंक्तियों में अपने यादगार के पलों के काव्यात्मक स्वरूप का वर्णन करना था, जिसमें 9 शिक्षक रचनाकारों ने भाग लिया तथा अपने शिक्षक जीवन के अविस्मरणीय पलों को काव्यात्मक रूप में बताया।

आयोजिका व संचालिका डॉ दवीना अमर ठकराल देविका ने अपनी शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े अविस्मरणीय संस्मरण याद करते हुए सभी उपस्थित सदस्यों का दिल की गहराई से आभार प्रकट करते हुए शिक्षक दिवस को मनाने के औचित्य व उसे सार्थक बनाने के लिए संदेश दिया।

त्यौहारों की इस श्रृंखला में मंच से जुड़े रचनाकारों ने इन आयोजनों में सक्रिय सहभागिता दी और आयोजन को सफल बनाया। इन कार्यक्रमों को मंच की संस्थापिका अध्यक्षा डॉ देवीना अमर ठकराल जी ने संयोजित तथा निर्देशित किया और सभी उपस्थित रचनाकारों का सादर आभार प्रस्तुत कर आयोजनों की सफलता तथा रचनाकारों की गरिमामयी सहभागिता को नमन करते हुए शीघ्रातिशीघ्र भविष्य में भी आभासी काव्य गोष्ठियों के लिए आश्वस्त किया।