समाज और साहित्य के सेतु : गोकुल राय

गोकुल राय सिक्किम के ऐसे संदर्भ में जिन्होंने अपने को समाज और साहित्य से जोड़ा है अपने गांव समूह से उन्होंने राष्ट्र समूह को मजबूत करने का दायित्व उठाया है रोज समाज एवं साहित्य सेवा उनका जुनून बन चुका है
वह सिक्किम के ऐसे व्यक्तित्व हैं जो हमेशा जन के बीच रख कर उसकी समस्या के समाधान के लिए तत्पर रहने वाले जन है उन्होंने अपने को समाज के लिए समर्पित कर दिया है सिक्किम के बिकमत (खोरलोंग)से निकालकर संपूर्ण समाज को जागरूक करने के लिए सामाजिक दायित्व का जो बीड़ा उठाया है वह आज भी उनके साथ एक समान रूप में गतिमान है वह किसी की चिंता किए हर कार्य सामाजिक दायरे में करने के लिए तत्पर रहते हैं हिंदी फिल्म का एक गाना ‘हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया ‘उन पर सटीक बैठता है वह समाज का हर कार्य अपना कार्य समझने वाले व्यक्तित्व हैं समाज की हर मूलभूत आवश्यकता के पूर्ति के लिए हर समय तत्पर रहने वाले व्यक्ति हैं उनके जीवन की धारा समाज की धारा से होकर आगे बढ़ती है उन्होंने समाज को बड़े करीब से जिया और समझा है इसलिए बेहद सरल रूप में समाज के दायित्व निर्वाहन में अपनी सहभागिता देते हैं वह रोज नया अनुबंध रचने वाले व्यक्तित्व हैं गांधी के सादा जीवन उच्च विचार से प्रभावित है इसलिए सदैव सादगी रूप में हर कार्य को संपादित करने में अपनी सहभागिता रखते हैं जीवन और समाज को एक रूप संदर्भ में रखते हैं इसलिए उनका निर्णय समाज के निर्माण पर निर्भर करता है
वह जीवन के प्रारंभिक अवस्था से ही पिता के आदर्शों से प्रभावित होकर उसे अपने जीवन में समाहित किया गांव की छोटे समूह (क्लबो) से समाज की सेवा करते हुए वह अपने सामाजिक दायित्व को विस्तार देते हुए सिक्किम के सामाजिक दायित्व के निर्वहन से अपना विशिष्ट स्थान बनाया उनकी इसी सामाजिक दायित्व को भारत सरकार ने पहचान और उन्हें 2001-2022में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित कर उनके सामाजिक निर्वहन को प्रमाणित किया बिकमत (खोरलोंग) में उनकी विशिष्ट पहचान है हर व्यक्ति विशेष उनसे भलि भांति परिचित है समाज का हर वर्ग समूह हर दायरे का व्यक्ति उन्हें सम्मान के साथ देखता है जिससे पता चलता है कि उनका दायरा कितना बड़ा है
मानव जीवन को कैसे शुद्ध रखा जाए राज्य और राष्ट्र को कैसे विकसित किया जाए उन्ही संदर्भों के लेकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु एक नया दायित्व का बीड़ा उठाया और लगभग डेढ़ दशकों से पर्यावरण, वन संरक्षण में उनकी विशेष भूमिका रही है मानवीय जीवन कैसे शुद्ध रह सकता है उसके लिए उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से उस कार्य को बड़ी तन्मयता के साथ संपादित किया है जीवन मूल्य और मानवीय संदर्भ दोनों उनके व्यक्तित्व का विशेष गुण है वह उसी मूल्य के दायर में अपना व्यक्तित्व निर्मित करते हैं इसलिए उन्हें अपनी चिंता नहीं है उन्हें चिंता है समाज के जन की इसलिए कि कबीर की युक्त ‘जो घर फुकै अपना चला हमारे साथ के पथ पर चलने वाले व्यक्ति हैं समाज सेवा उनका परमो धर्म है पर्वतीय क्षेत्र में जल संरक्षण और जल संवर्धन एक बड़ी समस्या है उस दायित्व का निर्वहन भी उन्होंने बड़े रूप में संपादित किया है इसके लिए उन्होंने विदेशो की यात्रा की और उसके नए आधुनिक तकनीक से परिचित होकर उसका प्रयोग सिक्किम में किया जिसमें उन्हें सफलता भी मिली है इतना ही नहीं दुग्ध उत्पादन डेयरी के संरक्षण में उन्होंने विशेष भूमिका निभाई साथ ही साथ वह डेयरी के संरक्षण में डायरेक्टर के पद को सुशोभित किया है जो उनके कार्य का प्रतिफल ही है उन्होंने अपने दायित्व का निर्वाहन समाज के दायरे में रखकर किया है इसलिए वह जन के बीच प्रिय रहे हैं उनके जन प्रियता के कारण वह दो बार जिला पंचायत सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल जन के सहयोग से पूर्ण किया है जो उनके सामाजिक लोकप्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण है वह समाज के दायित्व के साथ जन के भी प्रतिनिधित्व करते रहे हैं इसलिए समाज के दायित्व में लंबा कार्य करने के बाद समाज के दर्पण साहित्य संरक्षण की और उन्मुख हुए इसके लिए उन्होंने 2020 में कला साहित्य संस्थान बिकमत खोरलोंग की स्थापना करके साहित्य संरक्षण और उसके संवर्धन हेतु कार्यक्रम किया प्रत्येक वर्ष राज्य साहित्यकार सम्मान का आयोजन कर राज्य साहित्यकारों को एक मंच पर सम्मानित करने का जो कार्य कर रहे हैं वह भी सराहनीय है कला साहित्य संस्थान बिकमत सिक्किम के माध्यम से साहित्य प्रचार ,अनुवाद पुस्तकालय और चित्रकला के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने का जो कार्य कर रहे हैं वह बेहद अनुकरणीय है हाल में ही नेपाली साहित्य के सबसे बड़े वयोवृद्ध 86 वर्षीय साहित्यकार प्रेम थुलुग का अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित कर उन्होंने जो कार्य किया वह बेहद महत्वपूर्ण है उनका जीवन एक ऐसे रंगमंचीय संदर्भ का है जिसमें उनका अपना अपने लिए कुछ नहीं दूसरे के लिए और उसे संरक्षित करने का है
अंततः यह कहा जा सकता है वह समाज और साहित्य संरक्षक होने के साथ उसके संवर्धन में जो अपनी भूमिका निभा रहे हैं वह आने वाले दिनों में वह साहित्य और समाज सेतु रूप में जाने जाएंगे
प्रो. मुकेश कुमार मिश्र
अंतरराष्ट्रीय हिंदी प्रचारक
उत्तर प्रदेश