जंदाहा ओपन माइक काव्य संध्या कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न

जंदाहा ओपन माइक काव्य संध्या कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न

 

वैशाली/जंदाहा (संवाददाता- प्रकाश कुमार राय) – युवा भारत विकास संगठन के तत्वावधान में कैरियर मिशन कम्प्यूटर एकेडमी परिसर, जंदाहा में आयोजित ‘ जंदाहा ओपन माइक (काव्य संध्या) ‘ कार्यक्रम साहित्य, कला एवं संस्कृति का भव्य संगम बनकर उभरा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर व प्रांतीय स्तर के नामचीन कवियों, साहित्यकारों, छात्रों व कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभागी होकर एवं अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से दर्शक दीर्घा में उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुविख्यात सुश्री वर्षा ठाकुर ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जय सिंह राठौर रहे। जबकि, विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ.आनंद रंजन झा व मनोज साह की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच संचालन का कार्यभार सुश्री वर्षा ठाकुर ने बड़ी बख़ूबी से संभाली। कार्यक्रम के दौरान संगठन को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से कुछ सहयोगी व समर्पित लोगों को विशिष्ट पद पर मनोनीत करके उन्हें सुशोभित किया गया, जिसमें वर्षा ठाकुर को अध्यक्ष, जय सिंह राठौर को प्रांतीय संरक्षक, डाॅ. आनंद रंजन झा को जिला संरक्षक, मनोज साह को प्रखंड संरक्षक, सुनील कुमार सिंह उर्फ भोला सिंह को संगठन महामंत्री, हरिशंकर सिंह को संगठन संयोजक, राष्ट्रीय सलाहकार कवि दिव्यांश दुष्यंत, राष्ट्रीय संरक्षक प्रभात ठाकुर को मनोनीत किया गया। अपने संबोधन में जय सिंह राठौर, डाॅ.आनंद रंजन झा, मनोज साह सहित आदि गणमान्य अतिथियों ने कहा कि ऐसी साहित्यिक कार्यक्रम युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं तथा समाज में सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देते हैं। अध्यक्षीय संबोधन में वर्षा ठाकुर ने साहित्य का समाज का दर्पण बताते हुए युवा रचनाकारों को समाज का दर्पण बताते हुए युवा रचनाकारों को निरंतन लेखन एवं सृजन हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में हास्य कवि गौरव कुमार झा, डाॅ.प्रीतम कुमार झा, सुधीर कुशवाहा, सत्यम कुमार, शिवम, तनुजा, शृंगार-रस के कवि प्रकाश राय, आराधना सहित युवा भारत विकास संगठन के अनेक सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में आभार जताते हुए तथा संबोधन में कहा कि भविष्य में साहित्यिक कार्यक्रम का सरोकार बना रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच पर सभी अतिथियों व कवियों को प्रशस्ति-प्रत्र व अंगवस्त्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया गया।